युरोप के नीचे एक डूबा हुआ महाद्वीप है

हाल ही में वैज्ञानिकों ने दक्षिण युरोप के नीचे एक डूबा हुआ महाद्वीप खोजा है। ग्रेटर एड्रिया नामक यह महाद्वीप 14 करोड़ वर्ष पहले मौजूद था। शोधकर्ताओं ने इसका विस्तृत मानचित्र बनाया है।

साइंस में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ग्रेटर एड्रिया 24 करोड़ वर्ष पहले गोंडवाना से टूटने के बाद उभरा था। गौरतलब है कि गोंडवाना वास्तव में अफ्रीका, अंटार्कटिका, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य प्रमुख भूखंडों से बना एक विशाल महाद्वीप था।

ग्रेटर एड्रिया काफी बड़ा था जो मौजूदा आल्प्स से लेकर ईरान तक फैला हुआ था। लेकिन यह पूरा पानी के ऊपर नहीं था। उट्रेक्ट विश्वविद्यालय में डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंसेज़ के प्रमुख वैन हिंसबरगेन और उनकी टीम ने बताया है कि यह छोटे-छोटे द्वीपों के रूप में नज़र आता होगा। उन्होंने लगभग 30 देशों में फैली ग्रेटर एड्रिया की चट्टानों को इकट्ठा कर इस महाद्वीप के रहस्यों को समझने की कोशिश की।

गौरतलब है कि पृथ्वी कई बड़ी प्लेटों से ढंकी हुई है जो एक दूसरे के सापेक्ष खिसकती रहती हैं। हिंसबरगेन बताते हैं कि ग्रेटर एड्रिया का सम्बंध अफ्रीकी प्लेट से था, लेकिन यह अफ्रीका महाद्वीप का हिस्सा नहीं थी। यह प्लेट धीरे-धीरे युरेशियन प्लेट के नीचे खिसकते हुए दक्षिणी युरोप तक आ पहुंची थी।

लगभग 10 से 12 करोड़ वर्ष पहले ग्रेटर एड्रिया युरोप से टकराया और इसके नीचे धंसने लगा। अलबत्ता कुछ चट्टानें काफी हल्की थीं और वे पृथ्वी के मेंटल में डूबने की बजाय एक ओर इकठ्ठी होती गर्इं। इसके फलस्वरूप आल्प्स पर्वत का निर्माण हुआ।

हिंसबरगेन और उनकी टीम ने इन चट्टानों में आदिम बैक्टीरिया द्वारा निर्मित छोटे चुंबकीय कणों के उन्मुखीकरण को भी देखा। बैक्टीरिया इन चुंबकीय कणों की मदद से खुद को पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की सीध में लाते हैं। बैक्टीरिया तो मर जाते हैं, लेकिन ये कण तलछट में बचे रह जाते हैं। समय के साथ यह तलछट चट्टान में परिवर्तित हो जाती और चुंबकीय कण उसी दिशा में फिक्स हो जाते हैं। टीम ने इस अध्ययन से बताया कि यहां की चट्टानें काफी घुमाव से गुजरी थीं।

इसके बाद के अध्ययन में टीम ने कई बड़ी-बड़ी चट्टानों को जोड़कर एक समग्र तस्वीर बनाने के लिए कंप्यूटर की मदद ली ताकि इस महाद्वीप का विस्तृत नक्शा तैयार किया जा सके और यह पुष्टि की जा सके कि यूरोप से टकराने से पहले यह थोड़ा मुड़ते हुए उत्तर की ओर बढ़ गया था।

इस खोज के बाद, हिंसबरगेन अब प्रशांत महासागर में लुप्त हुई अन्य प्लेट्स की तलाश कर रहे हैं। अध्ययन की जटिलता को देखते हुए, किसी निष्कर्ष के लिए 5-10 साल की प्रतीक्षा करनी होगी। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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