
अत्यंत चौंकाने वाले घटनाक्रम में स्प्रिंगर नेचर ने मैक्स प्लांक द्वारा लिखित शोध पत्र को वापिस लेने (रिट्रेक्शन) की घोषणा की है। गौरतलब है कि प्लांक क्वांटम मेकेनिक्स के प्रमुख विचारकों में से थे और उन्हें 1918 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से भी नवाज़ा गया था। लिहाज़ा, जब क्यूबेक विश्वविद्यालय में विज्ञान के इतिहासकार येवेस गिन्ग्रास ने एक वेबसाइट पर मैक्स प्लांक का नाम देखा तो वे चकरा गए।
दरअसल रिट्रेक्शन वॉच नामक यह वेबसाइट वैज्ञानिक धोखाधड़ी, आंकड़ों से छेड़छाड़ तथा अन्य वैज्ञानिक दिक्कतों की सूची रखती है। वहां एक लिंक का शीर्षक था :‘रिट्रेक्शन्स बाय नोबेल प्राइज़ विनर्स’ (Retraction by nobel prize winners)। गिन्ग्रास ने इस लिंक पर क्लिक किया तो सूची में चौथा नाम था मैक्स प्लांक (Max plank)। गिन्ग्रास ने प्लांक के बारे ऐसे किसी कांड के बारे में उड़ती-उड़ती खबर भी नहीं सुनी थी। और तो और, प्लांक तो अपने चरित्र के लिए जाने जाते थे। उन्होंने यहूदियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कानून के संदर्भ में एडोल्फ हिटलर तक को चुनौती दी थी।
प्लांक के दोनों शोध पत्रों को चुपचाप 2022 में रिट्रेक्ट कर लिया गया था। ये शोध पत्र मूलत: जर्मन शोध पत्रिका नेचरविसेनशाफ्टेन (Naturwissenschaften) में 1940 के दशक में प्रकाशित हुए थे (आजकल यह पत्रिका स्प्रिंगर नेचर के स्वामित्व में है)।
खोजबीन करने पर पता चला कि प्लांक का एक आलेख 1942 में “Sinn und Grenzen der exakten Wissenschaft (सटीक विज्ञान का अर्थ और सीमाएं) शीर्षक से दो अन्य पत्रिकाओं में तथा किताबों में दो बार पुन:प्रकाशित हुआ था। यह एक दार्शनिक पर्चा था और इसमें इस बाबत विचार किया गया था कि वैज्ञानिक ज्ञान में निश्चितता कैसे हासिल की जाए।
एक ही रचना को एकाधिक बार रीपैकेजिंग करने को सेल्फ-प्लेजिएरिज़्म (स्वयं की रचना से चोरी) (Sef-plagiarism) माना जाता है और आजकल इसकी बहुत निंदा होती है क्योंकि ऐसा करके उस लेखक के प्रकाशनों की संख्या बढ़ जाती है। इसके अलावा यह कॉपीराइट नियमों के उल्लंघन के आरोप का कारण भी बनता है। नेचरविसेनशाफ्टेन की वेबसाइट पर इन पर्चों के रिट्रेक्शन का कारण कॉपीराइट उल्लंघन (copyright infringement) बताया गया था।
गौरतलब बात यह है कि इंटरनेट आने से पहले एक जैसी सामग्री को एकाधिक पत्रिकाओं में प्रकाशित करना आम बात थी, शायद इसलिए कि लेखक अलग-अलग श्रोता वर्ग तक पहुंचना चाहते थे। और प्लांक जैसे प्रमुख व्यक्तियों के लिए तो यह सामान्य बात थी। आइंस्टाइन ने भी ऐसा किया था, हालांकि वे रिट्रेक्शन से बच गए।
गिन्ग्रास और विज्ञान के एक अन्य इतिहासकार माहदी खेलफायूई ने आर्काइव्स पर एक प्रीप्रिंट में लिखा है कि 1942 के किसी शोध पत्र पर आजकल के मानकों को लागू कर देना अनुचित ही कहा जाएगा। वैसे भी प्लांक का निधन 1947 में हो गया था और वर्तमान में उनकी रचनाएं सार्वजनिक दायरे में उपलब्ध हैं।
गिन्ग्रास को ज़्यादा तकलीफ एक अन्य बात से हुई। आम तौर पर जब किसी पर्चे को रिट्रेक्ट किया जाता है, तो उसके डिजिटल संस्करण पर ऊपर से RETRACTED शब्द छाप दिया जाता है। यानी लोग उसकी इबारत को पढ़ सकते हैं। लेकिन प्रकाशक स्प्रिंगर नेचर ने तो उस पर्चे की जगह खाली स्थान छोड़ दिया है और वहां लिखा है: ‘यह पर्चा आलेख-उल्लंघन की वजह से हटा दिया गया है’।
आजकल नेचरविसेनशाफ्टेन का नाम दी साइन्स ऑफ नेचर हो गया है। दी साइन्स ऑफ नेचर की संपादक सुज़ान स्कारलेटा को तो रिट्रेक्शन की खबर तक नहीं थी। उनकी प्रतिक्रिया थी कि यह अजीब है। उनके विचार में यह सिर्फ उनके एल्गोरिदम (algorithm) की वजह से हुआ है और इसे सुधारा जाना चाहिए। दूसरी ओर स्प्रिंगर नेचर के प्रतिनिधि यह कहकर टिप्पणी करने से मुकर गए कि आम तौर रिट्रेक्शन सम्बंधी जानकारी गोपनीय होती है और सिर्फ सम्बंधित लेखकों से साझा की जाती है।
बहरहाल, प्लांक के दूसरे पर्चे का रिट्रेक्शन तो और भी चिंताजनक है। 1940 में प्रकाशित उस पर्चे को भी कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप के चलते वापिस लिया गया है। लगता है यहां भी कारस्तानी एल्गोरिदम की ही है।
1920 के दशक से भौतिक शास्त्री नील्स बोर और वर्नर हाइज़ेनबर्ग क्वांटम मेकेनिक्स (quantum mechanics) की एक व्याख्या को आगे बढ़ा रहे थे। इस कथित कोपेनहेगन व्याख्या में प्रस्ताव था कि उप-परमाणविक कण (subatomic particle) अजीबोगरीब ढंग से विभिन्न अवस्थाओं में एक साथ उपस्थित होते हैं और वे कोई निश्चित स्वरूप तभी अख्तियार करते हैं जब उनका अवलोकन किया जाए या मापन किया जाए।
प्लांक इस धारणा के विरोध में थे और उनका तर्क था कि बाह्य यथार्थ का अस्तित्व मानव द्वारा उसके अवलोकन अथवा मापन से स्वतंत्र है।
नवंबर 1940 में दार्शनिक एलोएस मुलर ने नेचरविसेनशाफ्टेन में प्लांक के नज़रिए की आलोचना अपने पर्चे नेचरविसेनशाफ्ट उंड रिएल ऑसेनवेल्ट (Naturwissenschaft und reale Aussenwelt – प्रकृति विज्ञान और वास्तविक बाह्य विश्व) में की थी। प्लांक ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने पर्चे के लिए ठीक इसी शीर्षक का उपयोग किया था। अब कई दशकों बाद स्प्रिंगर नेचर के एल्गोरिदम को यह कॉपीराइट का उल्लंघन दिखा।
इस रिट्रेक्शन को लेकर ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि कोपेनहेगन व्याख्या (copenhagen interpretation) को लेकर आज भी जीवंत बहस जारी है। इस रिट्रेक्शन के कारण इस महत्वपूर्ण विवाद को लेकर एक प्रमुख वैज्ञानिक-दार्शनिक के विचारों को ओझल कर दिया गया है। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit: https://static.wikia.nocookie.net/kardashev/images/3/32/Max_Planck.png/revision/latest/scale-to-width-down/739?cb=20250329164529








