
यह एक पुराना विचार रहा है कि कुछ पेड़ों के शिखर तूफान के दौरान चमकते होंगे। हालांकि फिल्म एवेटार Avatar Movie) में पेड़ नीली आभा बिखेरते नज़र आते हैं लेकिन जीव वैज्ञानिकों का मानना रहा है कि यह चमक किसी पारलौकिक शक्ति की वजह से नहीं बल्कि विद्युतीय चिंगारियों (Electric sparks) के कारण पैदा होती होगी। अब तक यह नज़ारा सिर्फ प्रयोगशालाओं में देखा गया था।
अब मौसम वैज्ञानिकों के एक दल ने प्रकृति में इसका लुत्फ उठाया है। हाल ही में उन्होंने जियोफिज़िकल रिसर्च लेटर्स में बताया है कि उन्होंने पत्तियों के सिरों के आसपास पराबैंगनी (यूवी) प्रकाश (Ultra Voilet) की टिमटिमाहट देखी है। इन वैज्ञानिकों को लगता है कि इस अवलोकन के आधार पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि तूफान किस तरह से धरती की सतह का विद्युतीकरण करके तड़ित उत्पन्न करते हैं। ये वायुमंडल विज्ञान (Atmospheric science) की प्रमुख गुत्थियां रही हैं।
तूफान के दौरान तूफानी बादल अत्यंत ऋणावेशित होते हैं। इसकी वजह से प्रेरण की प्रक्रिया द्वारा नीचे धरती पर एक धनावेश का सृजन होता है। चूंकि विपरीत आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, इसलिए धरती पर मौजूद धनावेश (Positive charge) बादलों के आवेश से दूरी को कम से कम करने की कोशिश करता है। इसी प्रक्रिया में आवेश सुचालक तनों और शाखाओं से होते हुए पत्तियों के सिरों तक पहुंच जाता है। शोधकर्ताओं का मत है कि यहां आवेश संकेंद्रित हो जाते हैं जिसकी वजह से एक शक्तिशाली विद्युतीय क्षेत्र (Electric Field) निर्मित हो जाता है। यह विद्युतीय क्षेत्र आसपास की हवा के अणुओं को उत्तेजित कर देता है। जब ये अणु वापिस सामान्य अवस्था में लौटते हैं तो वे रोशनी छोड़ते हैं।
सामान्य तौर पर कहीं भी पृष्ठभूमि में इतनी रोशनी होती है कि पत्तियों के सिरों की यह निहायत मद्धिम चमक दृश्य प्रकाश में दिखाई ही नहीं पड़ती। तो पेनसिल्वेनिया स्टेट विश्वविद्यालय के पैट्रिक मैकफारलैंड और विलियम ब्रुने ने इसका अवलोकन पराबैंगनी प्रकाश में करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने एक उपकरण (Equipment) भी बनाया जिसमें एक दूरबीन, एक पेरिस्कोप और एक उच्च गति वाला यूवी कैमरा जोड़ा गया था। इस उपकरण को एक कार पर लगाकर उन्होंने 2024 की गर्मियों में फ्लोरिडा से लेकर पेनसिल्वेनिया तक तूफानों का पीछा किया।
नॉर्थ कैरोलिना में किस्मत ने उनका साथ दिया। यहां उनका सामना एक लंबे चले (90 मिनट) तूफान से हुआ। इस दौरान उन्होंने दो पेड़ों का अवलोकन किया – एक स्वीटगन (Liquidambar styraciflua) और एक पाइन (लोबलॉली पाइन – Pinus taeda)। यहां उन्होंने एक सामान्य कैमरा और एक यूवी कैमरा से प्राप्त लहराती शाखाओं के सिरों के वीडियो की तुलना की; देखा गया कि टिमटिमाते यूवी बिंदु शाखाओं के सिरों से मेल खा रहे थे।
इस अवलोकन से पेड़ों के सिरों पर उत्पन्न रोशनी की बात की पुष्टि तो हुई ही, साथ में यह भी पता चला कि यह टिमटिमाहट अलग-अलग पेड़ों पर विभिन्न स्थानों पर हो सकती है। इससे पता चलता है कि फुदकना इन रोशनी बिंदुओं का स्वभाव (Nature) है, जो शायद आवेशों द्वारा पेड़ों पर अलग-अलग मार्ग अपनाने का परिणाम है।
शोधकर्ताओं ने इस तरह के जगमगाते बिंदुओं के प्रभावों पर भी चर्चा की है। जैसे इनके प्रभाव से हाड्रॉक्सिल मूलक (Hydroxyl radical) बनेंगे जिन्हें वायुमंडल के डिटर्जेंट भी कहा जाता है क्योंकि ये मीथेन और कार्बन डाईऑक्साइड को नष्ट कर देते हैं। यह शायद वैश्विक स्तर पर कोई असर न डाले लेकिन स्थानीय स्तर पर ज़रूर असर डाल सकता है। इसके अलावा, ये पेड़ों द्वारा उत्सर्जित वाष्पशील कार्बनिक पदार्थों के साथ क्रिया करके धुंध (Haze) भी पैदा कर सकते हैं।
वैसे यह स्पष्ट नहीं है कि स्वयं पेड़ों पर इस आवेश का कितना-क्या असर होता है। प्रयोगशाला अध्ययन तो बताते हैं कि इतने आवेश पर पत्तियों के सिरे झुलस जाते हैं, लेकिन यथार्थ में ऐसा दिखा नहीं है। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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