
एक हालिया वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 वर्षों में विज्ञान और टेक्नॉलॉजी में नेतृत्व (global science leadership) का संतुलन तेज़ी से बदला है। ऑस्ट्रेलियाई संस्थान ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक फॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) का दावा है कि चीन अब दुनिया की लगभग 90 प्रतिशत सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में शोध के मामले में सबसे आगे (technology dominance) है। यह स्थिति शुरुआती 2000 के दशक से बिल्कुल उलट है, जब इन क्षेत्रों में अमेरिका का दबदबा था।
ASPI ने मौजूदा और उभरती 74 तकनीकों पर प्रभावशाली शोध का अध्ययन किया। ये तकनीकें इसलिए अहम हैं क्योंकि ये किसी देश की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव को मज़बूत भी कर सकती हैं और खतरे में भी डाल सकती हैं। नतीजों के मुताबिक चीन 74 में से 66 तकनीकों में अव्वल है – जैसे परमाणु ऊर्जा, संश्लेषण जीवविज्ञान, उन्नत सामग्री और छोटे उपग्रह (nuclear energy, synthetic biology, advanced materials, small satellites)। जबकि अमेरिका कुछ ही क्षेत्रों, जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग और जियोइंजीनियरिंग, में आगे है।
यह बदलाव ऐतिहासिक माना जा रहा है। सदी की शुरुआत में जिन तकनीकों का अध्ययन किया गया था, उनमें से 90 प्रतिशत से ज़्यादा में अमेरिका आगे था, जबकि चीन की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से भी कम थी। लेकिन पिछले बीस वर्षों में चीन ने विज्ञान और तकनीक में बहुत तेज़ प्रगति (science power shift) की है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका कारण शोध, शिक्षा और नवाचार में चीन का भारी निवेश है।
चीन की पकड़ खासकर नई और तेज़ी से बढ़ती तकनीकों में मज़बूत है, जिसमें उसने सोच-समझकर संसाधन लगाए हैं। हालांकि, उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स जैसे कुछ पुराने और स्थापित क्षेत्रों में चीन अभी भी अग्रणी नहीं है और इन क्षेत्रों में अन्य देशों को बढ़त हासिल है।
इन रैंकिंग्स को तय करने के लिए ASPI की टीम ने दुनिया भर में प्रकाशित 90 लाख से ज़्यादा वैज्ञानिक शोध पत्रों का अध्ययन किया (scientific publications)। हर तकनीक के लिए 2020 से 2024 के बीच छपे सबसे ज़्यादा उद्धृत 10 प्रतिशत शोध पत्र चुने गए और देखा गया कि उनमें किस देश की कितनी भागीदारी है। किसी शोध पत्र का अन्य शोध पत्रों में जितना ज़्यादा हवाला (research impact analysis) दिया जाता है, उसे उतना ही प्रभावशाली और उच्च गुणवत्ता वाला माना जाता है। इस अध्ययन का एक निष्कर्ष यह रहा कि क्लाउड और एज कंप्यूटिंग (cloud and edge computing) जैसे क्षेत्रों में चीन सबसे आगे है। ये क्षेत्र एआई के लिए बेहद अहम हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इन नतीजों से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि अमेरिका की वैज्ञानिक ताकत अचानक खत्म हो गई है। अमेरिका आज भी प्रभावशाली शोध कर रहा है। लेकिन, यदि वह अहम वैज्ञानिक क्षेत्रों में सोच-समझकर निवेश नहीं करता तो महत्व खो सकता है। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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