
यह अगस्त 2024 की बात है। चैथम द्वीपसमूह (Chatham Islands) के प्रमुख द्वीप के निवासी मछुआरा निकाऊ डिक्स ने चैथम चौपाटी से इमारती लकड़ी के कुछ टुकड़े जुटाए थे। तब उन्हें भान नहीं था कि वे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज (archaeological discovery) कर रहे हैं। ये टुकड़े भारी बारिश के कारण खाड़ी से बहकर चौपाटी पर आ गए थे। अलबत्ता, वे जल्दी ही समझ गए कि ये कोई साधारण टुकड़े नहीं थे। जोड़ने पर इन्होंने एक नौका (ancient boat) का आकार ले लिया और जब वे वापिस वहां लौटे तो उन्हें लकड़ी का एक और टुकड़ा मिला जिस पर उभरे हुए खांचों की एक लड़ी थी।
उसके बाद से पुरातत्ववेत्ताओं ने उस स्थान से 450 मानव-निर्मित वस्तुएं खोजी हैं। इनमें 5 मीटर का एक पटिया है, जिसमें सुराख हैं और कई सारे छोटे-छोटे तराशे हुए लकड़ी टुकड़े हैं जिन्हें घोंघों के कवच और लावाजनित पत्थरों से सजाया गया था। इसके आसपास ही उन्हें गुंथी हुई रस्सियां भी मिलीं और लौकी की एक चिप्पी। अब वे जान गए हैं कि चौपाटी के रेत में शायद एक समूची नौका (Polynesian vaka boat) दबी हो सकती है, जिसे स्थानीय पोलीनेशियन भाषा में वाका कहते हैं।
वैज्ञानिकों ने रेडियोकार्बन डेटिंग (radiocarbon dating) की मदद से वाका पर चिपके रेशों की उम्र पता की है। ये रेशे 1440 से 1470 ईस्वीं के बीच के हैं। यह लगभग वही समय था जब चैथम के प्रमुख द्वीप रिकाहू पर मानव बसाहट के प्रथम अवशेष मिले हैं। देशज मोरिओरी लोग (Moriori people) इस द्वीप को इसी नाम से जानते हैं।
हवाई विश्वविद्यालय के पुरातत्ववेत्ता पैट्रिक किर्क का कहना है कि लकड़ी से बनी नौका या उसके टुकड़े मिलना बहुत बिरली बात है और हर बार ऐसी खोज महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनका कहना है कि इनका काल 15वीं सदी का है, तो यह उस समय की पोलीनेशियन समुद्री यात्राओं (Polynesian navigation) का अहम प्रमाण है। वैसे काल निर्धारण अभी पक्का नहीं है लेकिन अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता जस्टिन मैक्सवेल को लगता है कि इन मानव-निर्मित चीज़ों का उम्दा कुदरती परिरक्षण हुआ है और उनमें सामग्री की भरपूर विविधता दिखती है। इसके अलावा, मोरिओरी लोग इनके बारे में मौखिक परंपराओं की बातें जोड़ सकते हैं। इन सब कारणों के चलते यह खोज असाधारण है।
इससे पहले मैक्सवेल ने रिकाहू पर पहली बस्तियों का काल निर्धारण 1450 से 1650 ईस्वीं किया था। उसके लिए उन्होंने चारकोल और परागकणों के रिकॉर्ड का सहारा लिया था। रस्सी का एक टुकड़ा तो 1415 ईस्वीं का है जो इन स्थलों से भी पुराना है। और नौका के पास लौकी का टुकड़ा तो शायद 1400 ईस्वीं के आसपास का है। अलबत्ता, मैक्सवेल का मत है कि ये तारीखें सिर्फ इतना बताती (archaeological analysis) हैं कि इस वाका का आखरी उपयोग कब हुआ था; यह पता नहीं चलता कि इसे कब बनाया गया था।
अध्ययन की खास बात यह रही कि आदिवासी मुखियाओं ने वाका की लकड़ी और रेशों का काल निर्धारण करने की अनुमति दे दी थी किंतु वे अभी भी विचार कर रहे हैं कि और नमूने लेने की अनुमति दें या न दें। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit : https://www.science.org/do/10.1126/science.z6k1f44/full/_20251124_on_chathamislandlede.jpg