2026 में विज्ञान से उम्मीदें

र्ष 2026 विज्ञान (Science in 2026) के लिए एक निर्णायक साल साबित हो सकता है। इस वर्ष कृत्रिम बुद्धि (AI – एआई), चिकित्सा, अंतरिक्ष अन्वेषण और भूविज्ञान में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यहां ऐसी ही कुछ वैज्ञानिक संभावनाओं की चर्चा की जा रही है।

एआई का बढ़ता दायरा

अब एआई मात्र आंकड़ों का विश्लेषण करने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह शोध में भागीदार भी बन रहा है। 2026 में प्रयोगशालाओं में ऐसे एआई ‘एजेंट’ (AI in laboratories) आम हो सकते हैं, जो प्रयोगों की योजना बनाएंगे, नतीजों का विश्लेषण करेंगे और सीमित मानवीय निगरानी में फैसले भी लेंगे। एआई की भूमिका वाली ऐसी पहली बड़ी खोज इस साल आ सकती है।

हालांकि, एआई पर बढ़ती निर्भरता के साथ खतरे (AI risks) भी हैं। ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जहां एआई ने आंकड़ों को गलत समझा या उनको विलोपित (data misinterpretation) कर दिया। लिहाज़ा, एआई की सफलताओं के साथ-साथ उसकी सीमाओं को समझना भी ज़रूरी है।

इस बीच, एक और अहम तब्दीली हो रही है। बड़े व महंगे एआई मॉडल्स की जगह अब छोटे, तेज़ और विशिष्ट कामों (task specific AI) के लिए एआई सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं। ये इबारत पैदा करने की बजाय तार्किक व गणितीय समस्याएं हल करते हैं, और कुछ मामलों में बड़े सिस्टम से बेहतर हैं।

व्यक्तिविशिष्ट जीन संपादन

जीन संपादन तकनीक अब एक नए और ज़्यादा व्यक्ति-विशिष्ट (खासकर दुर्लभ जेनेटिक बीमारियों के) इलाज में दखल बना रही है। 2026 में बच्चों के लिए बनाए गए व्यक्ति-विशिष्ट जीन-उपचार (personalized gene editing) पर आधारित दो बड़े क्लीनिकल परीक्षण शुरू हो सकते हैं।

इनमें से एक परीक्षण उन बच्चों पर केंद्रित होगा जिन्हें कुछ जीन-विशेष (rare genetic disorders) में बदलाव के कारण चयापचय से जुड़ी दुर्लभ बीमारियां होती हैं, जबकि दूसरा परीक्षण जन्मजात प्रतिरक्षा तंत्र की बीमारियों पर केंद्रित होगा। अगर ये प्रयास सफल होते हैं तो इलाज का तरीका पूरी तरह बदल सकता है – एक-से इलाज की बजाय, मरीज़ के जीन के अनुसार उपचार मिल सकेगा।

सभी कैंसर के लिए एक परीक्षण

2026 में कैंसर से जुड़ी एक बहुत बड़ी उम्मीद ब्रिटेन में पूरी हो सकती है। वहां एक ऐसा रक्त परीक्षण जारी है, जो लक्षण उभरने से पूर्व ही लगभग 50 तरह के कैंसर की पहचान (early cancer detection) कर सकता है। यह परीक्षण खून में मौजूद कैंसर कोशिकाओं से निकले बेहद छोटे डीएनए टुकड़ों के आधार पर बताता है कि कैंसर शरीर के किस हिस्से में है। इस परीक्षण में 1.4 लाख से ज़्यादा लोग शामिल हैं। नतीजे अच्छे रहे तो कैंसर की शीघ्र पहचान आसान हो सकेगी और हज़ारों जानें बच सकेंगी।

साथ ही, दवा के परीक्षण से जुड़े नियमों में भी बदलाव हो रहे हैं। ब्रिटेन में प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया जाएगा, जिसमें नैतिक और नियामक मंज़ूरी (fast track drug approval) एक ही आवेदन से ली जा सकेगी। पहले इन मंज़ूरियों के लिए दो पृथक आवेदन करने होते थे। वहीं, नई दवाओं के परीक्षण चरण के लिए एफडीए द्वारा प्रस्तावित तब्दीली – दो क्लीनिकल परीक्षण की जगह एक परीक्षण – पर चर्चा जारी रहेगी।

चंद्रमा पर बढ़ती भीड़

2026 में चंद्रमा पर हलचल तेज़ हो सकती है (moon mission)। नासा का आर्टेमिस-II मिशन 1970 के दशक के बाद पहली बार अब इंसानों को चंद्रमा के चारों ओर घुमाएगा। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री होंगे। भले ही वे चंद्रमा पर उतरेंगे नहीं लेकिन यह भविष्य में मानव अवतरण की दिशा में एक अहम कदम होगा।

वहीं चीन चांग-ए-7 मिशन (Chang’e-7 mission) की तैयारी कर रहा है, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा। यह इलाका बेहद कठिन माना जाता है, लेकिन यहां हमेशा छाया में रहने वाले गड्ढों में बर्फ छिपी होने की संभावना है। भारत के सफल चंद्रयान-3 से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (lunar south pole)  को लेकर वैश्विक वैज्ञानिक रुचि और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ गई हैं।

मंगल के चंद्रमाओं की ओर

चंद्रमा से आगे अब वैज्ञानिकों का ध्यान मंगल ग्रह और उससे भी दूर की दुनिया पर है। जापान अपने MMX मिशन (Mars exploration) के ज़रिए मंगल के दो चंद्रमाओं – फोबोस और डाइमोस – का अध्ययन करने जा रहा है। इस मिशन की खास बात यह होगी कि फोबोस से नमूने पहली बार पृथ्वी पर आएंगे।

युरोपियन स्पेस एजेंसी 26 कैमरों से लैस PLATO नाम का एक शक्तिशाली अंतरिक्ष दूरबीन मिशन तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य पास के तारों के आसपास पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज करना है।

इसी दौरान भारत का आदित्य-L1 मिशन (solar observation, Aditya-L1 mission) सूर्य की गतिविधियों पर नज़र बनाए रखेगा। इससे वैज्ञानिक सूर्य से उठने वाले तूफानों को बेहतर समझ सकेंगे।

पृथ्वी में छिपे रहस्यों की खोज

पृथ्वी के रहस्यों को समझने के लिए चीन का उन्नत समुद्री ड्रिलिंग (deep sea drilling) जहाज़ मेंग शियांग अपना पहला अभियान शुरू करेगा। यह जहाज़ समुद्र के पेंदे के नीचे गहराई तक ड्रिल कर पृथ्वी की अंदरूनी परतों तक पहुंचने की कोशिश करेगा। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि टेक्टोनिक प्लेटें (tectonic plates research) कैसे खिसकती हैं और पृथ्वी का अंदरूनी ढांचा उसकी सतह को कैसे आकार देता है।

कुल मिलाकर, 2026 विज्ञान के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण वर्ष होगा। (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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