बांस के गुणों पर फिर एक नज़र

डॉ. डी. बालसुब्रमण्यन

बांस (तमिल में ‘मूंगली’) (bamboo plant)  एक प्राचीन पौधा है जो नम मिट्टी और कड़ी धूप में तेज़ी से बढ़ता है। बांस एशिया और लैटिन अमेरिका में काफी लोकप्रिय है; यहां लोग बांस का उपयोग कई तरह के कामों में करते हैं। खाद्य वैज्ञानिक और इतिहासकार के. टी. अचया ने अपनी किताब हिस्टोरिकल डिक्शनरी ऑफ इंडियन फूड में लिखा है कि भारत में प्राचीन समय से ही जैन भिक्षु और वनवासी भोजन में बांस के तने और पत्तियों को पकाते (bamboo as food) रहे हैं।

बांस ऐसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों और आर्द्र इलाकों में अच्छे से वृद्धि करते हैं, जहां धूप अच्छी पड़ती हो और मिट्टी जैविक पदार्थ से भरपूर हो। भारत में असम, त्रिपुरा, मिज़ोरम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु राज्यों में बांस खूब होते हैं (bamboo cultivation in India)। चंद्रमोहन सिंह और उनके साथियों ने ट्रीस, फॉरेस्ट्स एंड पीपुल जर्नल में एक पेपर प्रकाशित किया है, जिसका शीर्षक है ‘जंगल से भविष्य तक: जैव विविधता, स्वदेशी ज्ञान, पारिस्थितिक लचीलापन और पूर्वोत्तर भारत में वर्तमान स्थिति के साथ बांस के सम्बंध पर एक टिकाऊ नज़रिया (From Forest to future: A sustainable perspective on bamboo’s nexus with biodiversity, indigenous knowledge, ecological resilience, and current status in Northeast India)’। इस पेपर में बताया गया है कि बांस-आधारित उद्योगों को, स्थानीय ज्ञान का इस्तेमाल करके, वैज्ञानिक तरीकों  और नीतियों के ज़रिए मज़बूत किया जा सकता है। इसके लिए बांस शोध संस्थान स्थापित किए जा सकते हैं ताकि स्थानीय ज्ञान को बेहतर किया जा सके।

धीरे-धीरे बांस के नए उपयोग हो रहे हैं, जैसे डिस्पोज़ेबल प्लास्टिक (plastic alternatives) के बर्तनों की जगह बांस के बर्तन। असम के नुमालीगढ़ में, प्रधानमंत्री ने पिछले साल एक बायो-रिफाइनरी (bamboo bio-refinery) का उद्घाटन किया था जिसका उद्देश्य बांस से 50,000 मीट्रिक टन इथेनॉल का उत्पादन था। इसकी वेबसाइट पर भारत में बांस से बने कई उत्पादों का ज़िक्र है, जिनमें कपड़े, टोकरियां, चटाई, कुर्सियां, मेज़, अलमारियां, छत और फर्श, वाद्ययंत्र (बांसुरी और ढोल), तथा अगरबत्ती शामिल हैं। कुछ राज्यों ने बांस से बने उत्पादों को विकसित करने के लिए बांस अनुसंधान संस्थान (bamboo research institutes) भी स्थापित किए हैं।

बांस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बांस मिशन 2025 (National Bamboo Mission 2025) शुरू किया है, जिसके तहत बांस की खेती को बढ़ाना, उद्योग से कड़ियों को मज़बूत करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। इस पहल का उद्देश्य गैर-वन भूमि पर (जैसे खेतों, घरों, सामुदायिक भूमि और सिंचाई नहरों के किनारों पर) बांस के बागान बढ़ाना है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और उद्योगों के लिए कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, बांस और इसके उत्पादों (जैसे बड़े दर्पण, सूती वस्त्र और बांस के आभूषण) का अमेरिका, डेनमार्क और नाइजीरिया को निर्यात किया जाता है। विश्व स्तर पर, भारत बांस और उसके उत्पादों के शीर्ष तीन निर्यातकों में है (अन्य दो शीर्ष देश हैं चीन और वियतनाम)। इस निर्यात (bamboo exports from India) से लाखों-करोड़ों की आमदनी होती है। महाराष्ट्र, केरल और असम सहित कई राज्यों ने बांस शोध एवं तकनीकी संस्थान भी स्थापित किए हैं। ये बांस से बने टेक्सटाइल, इमारत सम्बंधी और खाद्य उत्पाद बेचते हैं।

पोषक मूल्य

नवंबर 2025 में, एडवांसेज़ इन बैम्बू साइंस नामक जर्नल में प्रकाशित एक शोधपत्र में बताया गया है कि बांस एक ज़ोरदार सुपरफूड (bamboo superfood) है। एंग्लिया रस्किन युनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में आहार में बैम्बू शूट (bamboo shoots nutrition), पत्तियों और बीजों के सेवन के पोषण सम्बंधी फायदों के बारे में बताया है और बताया है कि बांस की इन चीज़ों को खाने से ज़रूरी अमीनो एसिड, विटामिन A, B6 व E मिल सकते हैं। और रक्त शर्करा और लिपिड स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। बांस मधुमेह और ह्रदय सम्बंधी बीमारियों (diabetes and heart health) के लिए अच्छे हैं। वैज्ञानिकों ने बांस के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य परिणामों का एक व्यवस्थित बहु-देशीय विश्लेषण भी किया, जिससे पता चला है कि बांस से बने खाने में एंटीऑक्सीडेंट भी ज़्यादा होते हैं और प्रोबायोटिक फायदे भी मिलते हैं।

ग्रामीण लोगों के भोजन में तो बांस शामिल है ही, हम शहरी लोग कैसे लाभ ले सकते हैं? कूरियर सर्विस और कई ऑनलाइन वेंडर्स (online bamboo food products) और डिस्ट्रीब्यूटर्स बांस से बने खाद्य और उत्पाद बेचते हैं, और हम उनसे से खरीदकर खा सकते हैं। (स्रोते फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit : https://th-i.thgim.com/public/sci-tech/science/2ndm2s/article70591073.ece/alternates/LANDSCAPE_1200/1wchuttersnap-BofgeVFG-_w-unsplash.jpg

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