उड़ते समय भौंरे खुद को ठंडा कैसे रखते हैं?

भौंरे (bumblebees) ज़बर्दस्त उड़ाके होते हैं। वे लगभग 22 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकते हैं। इतनी तेज़ उड़ान के दौरान उनकी मांसपेशियां फड़फड़ाकर काफी गर्मी पैदा करती हैं। तो उड़ते समय भौंरे का शरीर बहुत गर्म हो सकता है। जैसे कार का इंजन (engine overheating), जिसे ठंडा न किया जाए तो खूब गर्म हो सकता है। तो भौंरे उड़ान के दौरान गर्म होकर झुलस क्यों नहीं जाते?

नए शोध (scientific research) से पता चला है कि वे अपने पंखों की तेज़ फड़फड़ाहट से बहने वाली हवा के ज़रिए खुद को ठंडा रखते हैं: जब भौंरा हवा में एक जगह ठहरकर उड़ता है, तो उसके पंखों से नीचे की ओर बहती हवा उसके शरीर का तापमान (body temperature cooling) लगभग 5 डिग्री सेल्सियस तक कम कर देती है। इतने छोटे कीट के लिए यह बहुत बड़ी राहत है।

उड़ान के दौरान भौंरों की मांसपेशियां (flight muscles) बहुत ज़्यादा गर्मी पैदा करती हैं। ठंड में तो यह गर्मी उड़ान के लिए वार्मअप (muscle warm-up) में काम आ जाती है। लेकिन गर्मियों में यह खतरनाक साबित होती है।

अतिरिक्त गर्मी (heat stress) से निपटने के उनके कुछ तरीके तो पहले से मालूम हैं। वे अपने वक्षस्थल (thorax) (जहां उड़ान की मांसपेशियां होती हैं) से गर्मी को शरीर के पिछले हिस्से तक एक खास द्रव के जरिए पहुंचा सकते हैं। वैज्ञानिक यह भी देखते रहे हैं कि धूप (solar heating) उन्हें कितना गर्म करती है और पसीने जैसी प्रक्रिया (वाष्पीकरण) से उन्हें कितनी ठंडक मिलती है। इन सबको मिलाकर वैज्ञानिक ‘ऊष्मा संतुलन मॉडल’ (heat balance model) कहते हैं। लेकिन अब तक एक बात स्पष्ट नहीं थी: क्या उनके पंखों से पैदा होने वाला वायु प्रवाह (airflow from wings) भी उन्हें ठंडा करने में मदद करता है।

इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने भौंरों को एक खास प्रयोगशाला कक्ष (laboratory experiment) में रखा, जहां हवा की गति मापने वाले उपकरण (air velocity sensors) लगे थे। जब भौंरे नकली फूलों के ऊपर मंडरा रहे थे, तब शोधकर्ताओं ने देखा कि उनके आसपास हवा लगभग 0.25 से 2 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से बह रही थी। धुंध जैसी हल्की फुहार का इस्तेमाल करके उन्होंने यह भी देखा कि हवा उनके शरीर के चारों ओर कैसे फैलती है।

यह जानने के लिए कि यह हवा उन्हें कितनी ठंडक देती है, वैज्ञानिकों ने और भी परीक्षण किए। उन्होंने भौंरों के शरीर में बहुत छोटे तापमापी (micro temperature sensors) लगाए और हवा की वही स्थिति बनाई। तापमान में बदलाव (thermal measurement) की तुलना करके उन्होंने पाया कि अगर पंखों से पैदा होने वाली यह ठंडक न मिले, तो भौंरा दो मिनट से भी कम समय में तपकर टपक सकता है।

यानी भौंरों के पंखों से पैदा होने वाला हवा का बहाव (natural cooling system) एक तरह का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम है। हालांकि वैज्ञानिक अभी पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि जब भौंरे उड़ते-उड़ते आगे बढ़ते हैं, तब यह प्रक्रिया कैसे काम करती है।

यह शोध इसलिए महत्वपूर्ण है कि बढ़ते वैश्विक तापमान (global warming) का सीधा असर भौंरों के जीवित रहने और परागण की क्षमता पर पड़ सकता है। अगर हम समझ लें कि भौंरे अपने शरीर की गर्मी को कैसे नियंत्रित (thermoregulation in insects) करते हैं, तो शायद भौंरो के बचाव के कुछ कारगर कदम (bumblebee conservation) उठा सकेंगे। (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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