खुद को आस्तीन की तरह सीधा-उल्टा करता कृमि

जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी के मेकेनिकल इंजीनियर डेविड हू जानना चाहते थे कि ये ब्लडवर्म इस कारस्तानी में इतने कुशल कैसे हैं? और ऐसा करते हुए उनकी मांसपेशियों को क्षति क्यों नहीं होती?

शोधकर्ताओं ने जब ब्लडवर्म (Glycera dibranchiata) की इस हरकत को रिकॉर्ड करके बारीकी से अध्ययन किया तो लगा कि ऐसा सूंड पर हर ओर मौजूद अत्यधिक झुर्रियों/सिलवटों की बदौलत संभव है। बहुत ही ज़्यादा झुर्रियां/सिलवटें होने से जब शुण्ड को बाहर की ओर उलटा जाता है, तो अंदर की त्वचा सामान्य से तीन गुना ज़्यादा फैल जाती हैं और मांसपेशियों को कोई क्षति भी नहीं होती। यह कुछ-कुछ हाथी की सूंड पर मौजूद झुर्रियों की तरह काम करता है(flexible biological structure)।

वीडियो यहां देखें
HTTPS://WWW.SCIENCE.ORG/CONTENT/ARTICLE/WATCH-SUPERSTRETCHY-BLOODWORMS-TURN-THEMSELVES-INSIDE-OU

ब्लडवर्म अपनी शुण्ड को 2 सेकंड से भी कम समय में पूरा पलटकर बाहर कर लेते हैं। वहीं इसे वापिस अंदर करने में लगभग 8 सेकंड लगते हैं और इसके लिए ज़्यादा जटिल हरकतें भी करनी पड़ती हैं।

ब्लडवर्म की यह बनावट ऐसे उलटने-पलटने वाले और लचीले रोबोट बनाने में सहायक हो सकती है। ऐसे लचीले रोबोट(soft robotics) मरीज़ों की मदद कर सकते हैं; ये रोबोट बिस्तर पर पड़े मरीज़ों के नीचे जाकर फैल और फूल सकते हैं, जिससे नर्सें उन्हें धीरे से इधर-उधर खिसका कर उनकी चादरें आसानी से बदल सकेंगी। (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit : https://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/9/9d/Glycera_dibranchiata_%28YPM_IZ_071023%29_002.jpeg/960px-Glycera_dibranchiata_%28YPM_IZ_071023%29_002.jpeg

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