अवैध खनन से शोध कार्य को खतरा

पेरू स्थित अमेज़न जंगल (Amazon rainforest) के पंगुआना जैविक अनुसंधान केंद्र (Panguana Biological Research Station) ने अपने सभी फील्ड अध्ययन बंद कर दिए हैं। यह फैसला इलाके में सक्रिय अवैध सोना खनन करने वालों से मिल रही धमकियों के कारण सुरक्षा की दृष्टि से लिया गया। 1968 में स्थापित यह केंद्र पेरू का सबसे पुराना पर्यावरण शोध संस्थान है। यहां दुनिया भर के वैज्ञानिक वर्षावन, वन्यजीवों और जैव विविधता पर अध्ययन करते रहे हैं। यह केंद्र युयापिचिस नदी के किनारे बने 1600 हैक्टर के एक संरक्षित क्षेत्र (protected forest area) में स्थित है और अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है।

हाल के महीनों में अवैध खनन वाले लोग संरक्षित क्षेत्र के बहुत करीब पहुंच गए हैं। इन लोगों ने कर्मचारियों को जान से मारने की धमकियां दीं और कई बार संरक्षण क्षेत्र में घुसने की कोशिश भी की है। कुछ मौकों पर हथियारबंद टकराव (armed conflict) और गोलियां चलने की घटनाएं हुईं, जिससे वैज्ञानिकों के लिए सुरक्षित रहकर काम करना असंभव हो गया है।

आम तौर पर इस शोध केंद्र में लगभग 30 वैज्ञानिक और सहायक कर्मचारी काम करते थे। पिछले कई वर्षों में यहां किए गए शोध से 300 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशन (scientific publications) सामने आए हैं, जिनमें कीटों, पौधों और वर्षावन की पारिस्थितिकी (rainforest ecology) पर महत्वपूर्ण काम शामिल है। लंबे समय से जुटाए गए आंकड़ों से यह समझने में मदद मिली है कि उष्णकटिबंधीय जंगल पर्यावरणीय बदलावों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।

पंगुआना शोध केंद्र में पेरू के चार जलवायु निगरानी टावरों में से एक मौजूद है। ये टावर लगातार धरती और वातावरण के बीच कार्बन, नमी और ऊर्जा के आदान-प्रदान (carbon flux monitoring) को मापते हैं। यह जानकारी जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए बेहद ज़रूरी होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार टावर बताता है कि एंडीज़ पर्वत (Andes mountains) कैसे अमेज़न के मौसम को प्रभावित करते हैं।

हालांकि टावर में लगे स्वचालित उपकरण दूर से अब भी डैटा (remote sensing data) इकट्ठा कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से वैज्ञानिकों और वालंटियर्स को वहां जाने से मना कर दिया गया है। स्टेशन प्रबंधन को डर है कि पहले की गई शिकायतों के बदले में खनन करने वाले लोग इस टावर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

पेरू में अवैध खनन एक गंभीर और बढ़ती हुई समस्या बन चुका है। अमेज़न कंज़र्वेशन (Amazon Conservation) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 1980 के बाद से खनन गतिविधियों ने 225 से ज़्यादा नदियों और झीलों को नुकसान पहुंचाया, करीब 1.4 लाख हैक्टर जंगल नष्ट किए, और कई आदिवासी समुदायों (indigenous communities) को प्रभावित किया है। यह काम अक्सर उन दूर-दराज़ इलाकों में फैलता है, जहां सरकार की मौजूदगी बहुत कम होती है। स्थानीय अभियोजक भी मानते हैं कि कमज़ोर निगरानी और कार्रवाई की कमी के कारण अवैध खनन लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में पुलिस और सेना ने कुछ मशीनें नष्ट कीं, लेकिन इलाके में तनाव अब भी बना हुआ है।

फिलहाल क्षेत्रीय प्रशासन ने सीमित गश्त (security patrols) का सुझाव दिया है, लेकिन वैज्ञानिकों को चिंता है कि अगर मज़बूत सुरक्षा नहीं मिली, तो अमेज़न का यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक केंद्र लंबे समय तक बंद ही रह सकता है। (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit : https://www.science.org/do/10.1126/science.z5w55jt/full/_20260114_on_peru_mining_lede.jpg

प्रातिक्रिया दे