क्या ढलती उम्र को पलटना संभव है?

क ताज़ा शोध (scientific research) में वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने में सफलता हासिल की है कि कैसे उम्रदराज़ कोशिकाओं को स्टेम कोशिकाओं में पलटा जा सकता है| स्टेम कोशिका से मतलब है, ऐसी भ्रूण कोशिकाएं जो तब तक किसी विशेष कार्य को करने के लिए विकसित नहीं हुई होती हैं। अलबत्ता, आगे चलकर वे कोई एक विशेष कार्य को करने के लिए विभेदित (cell differentiation) या विशेषीकृत हो जाती हैं। उसके बाद वे अपने बकाया जीवन में वही विशिष्ट कार्य करती रहती हैं। जैसे स्टेम कोशिकाएं विभेदित होकर रक्त कोशिकाओं, त्वचा कोशिकाओं, मांसपेशी या ऐसे ही किसी काम को करने के लिए विभेदित हो जाती हैं| स्टेम कोशिकाओं की एक खास बात यह होती है कि उनमें असीमित विभाजन क्षमता (cell regeneration) होती है।

दरअसल, वर्ष 2006 में जापानी वैज्ञानिक शिन्या यामानाका (Shinya Yamanaka) ऐसे चार विशेष प्रोटीन खोजने में सफल हुए थे जो किसी भी वयस्क कोशिका को स्टेम कोशिका में परिवर्तित कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें 2012 में नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) से सम्मानित भी किया गया था और उन्हीं के नाम पर इन चार प्रोटीन्स को यामानाका फैक्टर्स कहते हैं।

परंतु तब शोधकर्ताओं के सामने एक बड़ी समस्या थी कि इन परिवर्तित कोशिकाओं को असीमित विभाजन (cancer risk) करने से कैसे रोका जाए। क्योंकि कोशिकाओं का अनियंत्रित विभाजन कैंसर को जन्म दे सकता है| इस समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने चार में से एक प्रोटीन, C-MYC (oncogene) को हटा दिया जो अनियंत्रित विभाजन का कारक था| इस प्रक्रिया को वैज्ञानिकों ने ‘आंशिक रीप्रोग्रामिंग’ कहा। इसमें तीन प्रोटीन्स, OCT4, SOX2, KLF4 (cell factors) का उपयोग करके कोशिका को परिवर्तित किया गया|

शोधकर्ताओं ने चूहे पर अध्ययन (mouse study) किया था, उनमें इन प्रोटीन्स के इस्तेमाल से मांसपेशियों और हृदय से सम्बंधित क्षति में सुधार, अधिक स्वस्थ त्वचा, और वृद्ध चूहों की स्मृति (memory improvement) में भी सुधार दिखा है| सात वर्ष पहले भी ऐसे ही एक और अध्ययन में चूहों की आंखों से सम्बंधित विकारों (vision disorders) में नई कोशिकाओं का निर्माण और सुधार दिखा था|

चिंताजनक बात यह है कि कैंसरकारी प्रोटीन को हटाने के बावजूद भी इसका मनुष्य पर सीधा उपयोग जोखिम भरा साबित हो सकता है| फिलहाल वर्ष 2026 में लाइफ बायोसाइंस कंपनी (Life Biosciences) पहली बार मनुष्यों पर इसका अध्ययन करेगी| उनका मुख्य लक्ष्य क्षतिग्रस्त रेटिना की तंत्रिका कोशिकाओं को ठीक करना और दृष्टि में सुधार (vision restoration) करना होगा। वैसे शुरुआत में मात्र 12-18 लोगों पर ही इसका अध्ययन सावधानीपूर्ण किया जाएगा ताकि किसी भी दिक्कत का जल्द पता किया जा सके| इस तकनीक (anti aging technology) से बढ़ती उम्र से सम्बंधित रोगों का उपचार करने में सहायता होगी; पुराने हो चुके अंगों, जैसे आंख, हृदय, गुर्दे, लिवर, और यहां तक कि मस्तिष्क का सुधार, कायाकल्प और नवीकरण करने में सफलता प्राप्त हो सकती है| यदि यह अद्भुत क्रांतिकारी तकनीक (medical breakthrough) कारगर साबित हुई तो चिकित्सा जगत में एक अमूल्य खोज साबित होगी, और किसी वरदान से कम नहीं होगी| (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit : https://static.scientificamerican.com/dam/asset/49991187-f877-4849-a21c-5aa411329647/old-and-young-closeup.jpeg?m=1775759433.057&w=900

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