सौर तूफानों पर नज़र रखेगा SMILE मिशन

यूरोप और चीन एक संयुक्त मिशन शुरू कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य पृथ्वी की चुंबकीय ढाल (Magnetic field) को बेहतर तरीके से समझना है। स्माइल (SMILE) नामक अंतरिक्ष यान (spacecraft) यह अध्ययन करेगा कि सूर्य से आने वाले खतरनाक विकिरण (solar radiation) से पृथ्वी की ,सुरक्षा कैसे होती है। उम्मीद है कि इससे उपग्रहों, संचार व्यवस्था, जीपीएस और बिजली नेटवर्क का बेहतर संचालन संभव हो सकेगा।

पृथ्वी के चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटोस्फीयर) है। यह सूर्य से आने वाले अधिकांश आवेशित कणों को रोक देता है। लेकिन जब सूर्य पर बड़े विस्फोट – जैसे सौर तूफान – होते हैं, तो यह सुरक्षा ढाल प्रभावित हो सकती है और उपग्रहों, जीपीएस (GPS), रेडियो संचार (Radio communication) और बिजली व्यवस्था (Electricity) में गड़बड़ी पैदा हो सकती है।

वैज्ञानिक कई दशकों से अंतरिक्ष यानों की मदद से मैग्नेटोस्फीयर (Magnetosphere) का अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन अब तक वे सिर्फ छोटे-छोटे हिस्सों को ही देख पाते थे। SMILE मिशन सूर्य और पृथ्वी के बीच होने वाली पूरी प्रक्रिया की बड़ी तस्वीर दिखाएगा।

यह अंतरिक्ष यान एक दीर्घवृत्ताकार कक्षा में घूमेगा और पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव से लगभग 1,21,000 किलोमीटर दूर तक जाएगा। वहां से इसका एक्स-रे कैमरा मैग्नेटोस्फीयर के उस हिस्से को देखेगा, जो सूर्य की तरफ होता है। सूर्य से आने वाले कण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल से टकराकर एक्स-रे (X-Ray) उत्सर्जित करते हैं। इस उत्सर्जन के अवलोकन की मदद से समझा जा सकेगा कि पृथ्वी की चुंबकीय ढाल का आकार कैसे बदल रहा है।

उम्मीद है कि इस मिशन से सौर तूफानों की बेहतर समझ और अंतरिक्ष मौसम (space weather) की ज़्यादा सटीक भविष्यवाणी करने में मदद मिलेगी। यह जानकारी उपग्रह (satellite), संचार नेटवर्क और बिजली व्यवस्था जैसी तकनीकी प्रणालियों को सौर तूफानों से होने वाले नुकसान से बचाने में मददगार होगी।

यह मिशन ध्रुवीय ज्योति (ऑरोरा) (aurora) का भी अध्ययन करेगा। ये तब बनती हैं जब सूर्य से आने वाले आवेशित कण मैग्नेटोस्फीयर के ज़रिए ऊपरी वायुमंडल तक पहुंचकर गैस अणुओं (Gseous Atoms) से टकराकर रोशनी पैदा करते हैं। अधिकांश रोशनी अल्ट्रावायलेट (Ultraviolet) होती है, जिसे इंसानी आंखें नहीं देख सकतीं। SMILE का खास कैमरा इन अदृश्य गतिविधियों को देखकर यह समझने में मदद करेगा कि सौर कण पृथ्वी के वायुमंडल (atmosphere) में कैसे प्रवेश करते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इन दोनों तरह की जानकारी को साथ मिलाकर यह बेहतर समझा जा सकेगा कि सूर्य की ऊर्जा पृथ्वी के चुंबकीय वातावरण में कैसे यात्रा करती है। इससे अंतरिक्ष मौसम से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलने के अलावा, पृथ्वी की चुंबकीय सुरक्षा प्रणाली को बेहतर समझने में और तकनीक पर निर्भर दुनिया को सौर तूफानों (solar storms) के खतरों से बचाव को बेहतर बनाने में  भी मदद मिलेगी।

एक और खास बात है कि यह मिशन युरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और चायनीज़ एकेडमी ऑफ साइन्सेज़ का पहला संयुक्त मिशन है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान में देशों के बीच सहयोग और मज़बूत हो सकता है। (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
PhotoCredit:https://www.esa.int/var/esa/storage/images/esa_multimedia/images/2019/03/the_smile_mission/19277478-1-eng-GB/The_Smile_mission_pillars.jpg

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