
दिमाग का सफाई तंत्र उसकी तीन स्तरीय झिल्ली (मेनिन्जेस) (Maninges) में बसा होता है। यह तंत्र भौतिक क्षति से उसे महफूज़ रखने के अलावा रोगजनकों से भी सुरक्षा करता है। इस त्रि-स्तरीय झिल्ली की सबसे बाहरी परत में बड़ी-बड़ी रक्त शिराओं (वीनस साइनस) का एक जाल फैला होता है। पहले माना जाता था कि ये शिराएं मात्र रक्त प्रवाह का काम करती हैं। लेकिन नेचर में हाल में प्रकाशित एक शोध पत्र में इनकी विविध भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।
शोध पत्र में बताया गया है कि ये शिराएं मस्तिष्क और खोपड़ी में तरल (Cerbrospinal fluid) की निकासी का काम करती हैं। अध्ययन में चूहों और मनुष्यों में वीनस साइनसों को खून तथा सेरेब्रोस्पाइनल द्रव को पम्प करके बाहर निकालते देखा गया। यह भी देखा गया कि ये शिराएं अपनी कोशिकाओं को इधर-उधर करके गश्ती प्रतिरक्षा कोशिकाओं के लिए जगह भी बनाती रहती हैं।
अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि मस्तिष्क की सरहदें अत्यंत बारीकी से संचालित इंटरफेस हैं, न कि मात्र भौतिक आवरण। शोध पत्र के एक लेखक डोरियन मैकगैवर्न का कहना है कि दरअसल, वीनस साइनसों (Venous sinus) की गतिशील प्रकृति केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की रक्षा के लिए अहम है क्योंकि शोथ तथा खोपड़ी में तरल पदार्थ का जमावड़ा और दबाव मस्तिष्क को क्षति पहुंचा सकता है और साइनस ऐसे तनाव होने पर मस्तिष्क के कार्य को जारी रखने में मदद करते हैं।
प्रयोग में शोधकर्ताओं ने जीवित, निश्चेतित चूहों में वीनस साइनसों की गतिविधियों का अवलोकन किया। इसके लिए उन्होंने खोपड़ी के एक वर्ग मिलीमीटर क्षेत्र को खुरचकर इतना पतला कर दिया था उसमें से लेज़र पुंज आसानी से गुज़र सके। यह लेज़र पुंज प्रतिरक्षा कोशिकाओं को प्रकाशित करेगा जिन्हें एक फ्लोरेसेंट प्रोटीन (Fluorescent proteins) से चिंहित कर दिया गया था। इस तकनीक को इंट्रावायटल इमेजिंग कहते हैं। इसकी मदद से शोधकर्ता खोपड़ी के अंदर स्थित, अरेखित (चिकनी) मांसपेशियों में लिपटी बड़ी शिराओं की धड़कन का अवलोकन कर पाए जब वे तरल की निकासी के लिए सिकुड़ और फैल रही थीं।
शोधकर्ता शिराओं की दीवारें निर्मित करने वाली एंडोथीलियल कोशिकाओं (Endothelial cells) का वीडियो बना पाए और देख पाए कि उनमें 1 माइक्रोमीटर व्यास तक के बारीक सुराख हैं। इन सुराखों को फेनेस्ट्रेशन (Fenestration) कहते हैं और ये तरल पदार्थ, अणुओं तथा सूक्ष्मजीवों को आर-पार जाने देते हैं। यह भी देखा गया कि शिराएं गश्ती प्रतिरक्षा कोशिकाओं के लिए जगह बनाने के लिए अपने आवरण को पुनर्व्यवस्थित भी कर पा रही थीं। शोधकर्ताओं ने इस विचित्र व्यवहार को रफ्लिंग (Ruffling) नाम दिया है।
मैकगैवर्न कहते हैं कि उन्होंने शिराओं को ऐसा करते पहली बार देखा है। उनके सुराख लगातार खुलते-बंद होते रहते हैं और इसका नियमन मुख्य रूप से प्रतिरक्षा कोशिकाएं करती हैं। ये प्रतिरक्षा कोशिकाएं लगातार साइनस की दीवारों की सतत निगरानी करती हैं और इससे पता चलता है कि साइनसों की एंडोथीलियल कोशिकाओं में इतना लचीलापन (Flexibility) होता है।(स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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