
शीर्षक पढ़ते ही मन में यह सवाल उठता है: क्या ऐसा सचमुच मुमकिन है? हाल ही में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने ऐसी ही चौंका देने वाली जानकारी को साझा करते हुए पुरानी समझ को चुनौती दी है। नेचर पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि साधारण बेहोशी वाली दवा देने के बावजूद भी इंसानी दिमाग (Human Brain) सामान्य अवस्था जैसा सक्रिय (Concious) रहता है। यहां तक कि दिमाग बेहोशी की हालत में भी संकेतों को समझता और आगे का अनुमान लगाता है। पिछले कुछ अध्ययनों में यह पता लगाया जा चुका है कि दिमाग के संवेदना-ग्राही हिस्से बेहोशी की हालत में इंद्रियों के संकेतों से सरल ध्वनियों को दर्ज कर सकते हैं। लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि क्या दिमाग बेहोशी की हालत में समझ और सीख भी सकता है।
इसी का पता लगाने के लिए बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के तंत्रिका वैज्ञानिक समीर शेठ और उनके साथियों ने सात ऐसे मरीज़ों पर अध्ययन किया, जिनका मिर्गी के इलाज के लिए मस्तिष्क का ऑपरेशन किया जा रहा था। सातों को प्रोपोफोल (Propofol) नामक दवा (जनरल एनेस्थीसिया) से बेहोश करके उनके दिमाग की गतिविधि को रिकॉर्ड किया गया।
इस अध्ययन को दो समूहों में बांटकर किया गया था। पहले समूह में, बेहोशी की हालत वाले तीन प्रतिभागियों को अलग-अलग आवृत्ति की बार-बार दोहराई जाने बीप सुनाई गई और बीच-बीच में कुछ अन्य ध्वनियां। दस मिनट तक मस्तिष्क की तंत्रिका गतिविधियां रिकॉर्ड करने से पता चला कि समय के साथ ‘बेहोश’ दिमाग के हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) हिस्से में बीप को अन्य ध्वनियों से अलग पहचानने और उनकी अलग-अलग आवृत्तियों के बीच अंतर करने की क्षमता बढ़ती गई। अर्थात लगता है कि दिमाग अचेतन सीखने की क्षमता रखता है।
शेष चार प्रतिभागियों को कुछ वार्तालाप के हिस्से सुनाए गए। दिमागी रिकॉर्डिंग में देखा गया कि कुछ तंत्रिकाएं (Neurons) शब्दों के विशेष हिस्सों पर प्रतिक्रिया दे रहीं थीं (जैसे संज्ञाओं को बाकी शब्दों से अलग पहचानना)। एक शोधकर्ता के अनुसार, ‘बेहोशी (Unconcious) में भी प्रतिभागी यह अनुमान लगाने में समर्थ थे कि अगला शब्द क्या हो सकता है’। आखिर में, बेहोश प्रतिभागियों और सामान्य (बाहोश) प्रतिभागियों के आंकड़ों की तुलना की गई। देखा गया कि सामान्य और बेहोश, दोनों ही तरह के प्रतिभागियों के दिमागों का बर्ताव लगभग एक जैसा रहा।
यह दर्शाता है कि दिमाग का एक हिस्सा – हिप्पोकैम्पस (जो नई यादें बनाने और सीखने की क्षमता के लिए जिम्मेदार है), बेहोश हालत में भी जानकारी का आकलन और अनुमान लगाने में सक्षम है। वैज्ञानिक अभी अन्य तरह से काम करने वाले निश्चेतकों पर भी प्रयोग करना चाहेंगे ताकि और अधिक दृढ़ प्रमाण मिलें जो इस प्रयोग के परिणामों की पुष्टि कर सकें।
इस जानकारी का इस्तेमाल चिकित्सा क्षेत्र में किया जा सकता है। इन आंकड़ों की मदद से ऐसे मरीज़ों का उपचार संभव हो सकेगा जो कोमा या निष्क्रिय हालत से पीड़ित हैं। इससे दिमाग के क्षतिग्रस्त हिस्सों को छोड़कर, बाकी बचे हुए सही हिस्सों को कृत्रिम रूप से सक्रिय करने में मदद मिल सकेगी। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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