
जटिल और अनगिनत रहस्यों से भरी महासागर की दुनिया (ocean world) को समझने के लिए शोधकर्ता आए दिन नए-नए प्रयोग आज़माते रहते हैं। लेकिन अप्रैल 2025 में हुई एक बेहद रोमांचक और गहरी समुद्रतल (deep sea dive) यात्रा ने वैज्ञानिकों की पुरानी समझ को बदलकर रख दिया। साइंस पत्रिका में प्रकाशित यह खोज समुद्र तल के निर्माण और उससे जुड़े राज़ खोल देने वाली साबित हुई है।
‘ईस्ट-पैसिफिक राइज़’ (east pacific rise) के अध्ययन के दौरान भू-रसायन शास्त्री एंड्र्यू वोज़्नियाक और उनकी टीम गहरी-समुद्री पनडुब्बी एल्विन में सवार होकर समुद्र की 2500 मीटर गहराई में उतरी। उनका उद्देश्य ‘टीका’ (Tica) नामक हाइड्रोथर्मल क्षेत्र का अध्ययन करना था। अमूमन यह इलाका ट्यूबवर्म, विशाल सीपों, और पेल्ट मछलियों से भरा होता है। लेकिन जब एल्विन टीका के इलाके में पहुंची तो वहां का नज़ारा हैरतअंगेज़ था।
जहां रंग-बिरंगे समुद्री जीव होने थे, वहां कालिख तैर रही थी; ट्यूबवर्म मलबे में लिपटे हुए थे; कुछ दूरी पर चमकीली-पीली रोशनी भी दिखी, जो वास्तव में जलमग्न ज्वालामुखी (immersed volcano) का ताज़ा बहता लावा था। यह मानव इतिहास में पहला मौका था जब वैज्ञानिकों ने मध्य-महासागरीय रिज (पर्वतमाला) में हुए किसी ज्वालामुखी विस्फोट को अपनी आंखों से देखा था।

क्या है मध्य–सागरीय रिज?
यह महासागर के भीतर जलमग्न पर्वतों की लंबी कतारें हैं, जो ज़मीनी (टेक्टॉनिक प्लेटों के) खिसकाव के कारण बनती हैं। ये पूरे महासागर में फैली दुनिया की सबसे लंबी पर्वत शृंखलाएं हैं। महासागरीय प्लेटों के दूर जाने, टकराने या रूपांतरण के कारण लावा बाहर की ओर रिसता है, जिससे समुद्र के पेंदे पर नई परत बनती है। इन्हीं प्लेटों की हलचल के कारण समुद्र में पर्वत और गहरी खाइयां (Mid-ocean ridges) बनती हैं।
एक शृंखला मध्य अमरीका के कोस्टा रिका से लगभग 2000 किलोमीटर दूर है। ‘टीका’ ऐसा ही सक्रिय क्षेत्र है, जहां एल्विन (Alvin) टीम ने परीक्षण के दौरान समुद्री ज्वालामुखी का अवलोकन किया।
अलबत्ता, सक्रिय विस्फोट के जोखिम को देखते हुए वैज्ञानिकों ने एल्विन टीम को दोबारा भेजने की बजाय परीक्षण करने के लिए वहां स्थापित अस्थायी कैमरे का इस्तेमाल किया। उन्होंने पाया कि विस्फोट वाले क्षेत्र का तापमान बढ़कर 10 डिग्री सेल्सियस हो चुका था (सामान्य स्थिति में समुद्रतल का तापमान 1 से 2 डिग्री सेल्सियस होता है); विस्फोट के कारण भारी मात्रा में लौह उत्सर्जन (iron emission) हुआ, जो पूरे महासागर के सालाना लौह उत्सर्जन के बराबर था। साथ ही, विस्फोट वाली जगह के ठंडे लावा पर महज़ डेढ़ दिन में समुद्री जीवन भी दोबारा पनपता दिखा।
इससे पहले भी साल 2024 में, फ्रांस के वैज्ञानिकों की टीम ने दक्षिण-पूर्वी हिन्द महासागरीय रिज (South east Indian Ocean ridge) के क्षेत्रों की हलचल का अध्ययन करने के लिए समुद्र तल में प्रेशर सेंसर और हाइड्रोफोन लगाए थे। वैज्ञानिकों का अंदेशा था कि टेक्टॉनिक प्लेटों (tectonic plates) के खिसकने से उपकरणों में केवल कुछ सेंटीमीटर हलचल ही दर्ज होगी। लेकिन 2025 में जब उपकरणों को निकाला गया तो नतीजे उनके अनुमान से कई गुना ज़्यादा निकले। नेचर पत्रिका में प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक, केवल 2 हफ्तों में प्लेटें 2 मीटर से अधिक खिसक गई थीं, जिससे समुद्रतल 4 मीटर तक नीचे धंस गया और लगभग 16 करोड़ वर्ग मीटर में ताज़ा लावा फैल गया।
इस खोज के पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि महासागरीय प्लेटें (oceanic plates) धीरे-धीरे और लगातार खिसकती हैं। लेकिन इस अध्ययन से साबित हुआ कि यह खिसकाव अचानक और बड़े झटकों के रूप में होता है। हालांकि, पानी के घर्षण-रोधी स्वभाव के कारण भूकंप जैसे तेज़ झटके पैदा नहीं होते, इसलिए भूकंपीय सेंसर से इस हलचल का पता लगाना लगभग नामुमकिन-सा है। इन अवलोकनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महासागरीय गतिविधियों (oceanic activities) को लेकर अब तक की हमारी समझ में काफी खामियां थीं। बहरहाल, यह खोज महासागर के रासायनिक और कार्बन संतुलन को समझने में मदद करेगी। बेशक, महासागर अनगिनत रहस्यों का भंडार है और भविष्य में विज्ञान समय-समय पर ऐसे ही रोमांचक नतीजे पेश करता रहेगा। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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