सूखे से मात नहीं खाते ये गगनचुंबी पेड़!

ह मानना स्वाभाविक लगता है कि ऊंचे पेड़, छोटे पेड़ों की तुलना में सूखे के प्रति अधिक संवेदनशील होंगे। क्योंकि सूखे के हालात में लंबे पेड़ जड़ों से एक हद से ऊपर पानी पहुंचाने में नाकामयाब रहेंगे और जल्दी दम तोड़ देंगे। लेकिन हाल के एक अध्ययन ने इस सोच को बदल दिया है। साइंस पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन मलेशिया के बोर्नियो द्वीप (borneo island) स्थित काबिली सेपिलोक फॉरेस्ट रिज़र्व में कार्डिफ युनिवर्सिटी के वन पारिस्थितिकीविद पाउलो बिटनकोर्ट और उनकी टीम ने डिप्टेरोकार्प जीनस (वंश) के पेड़ों पर किया। डिप्टेरोकार्प (Dypterocarp) दुनिया के सबसे ऊंचे और विशाल पेड़ों में शुमार है, जिनकी ऊंचाई लगभग 45 मीटर से 100 मीटर तक होती है। ये दक्षिण-पूर्व एशिया के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों (Tropical rainforests) में ऊंचाई वाले इलाकों में पाए जाते हैं।

शोधकर्ताओं ने डिप्टेरोकार्प की पांच प्रजातियों के 38 अलग-अलग पेड़ों (ऊंचाई 7.1 मीटर से लेकर 71 मीटर) की शाखाओं और तने के भीतरी हिस्से (ट्रंक कोर) (trunk core) के नमूने लिए। अलग-अलग ऊंचाई वाले पेड़ों से लिए गए नमूनों का अध्ययन करके आसानी से पता लगाया जा सका कि ऊंचाई बढ़ने से पेड़ों की जल-प्रणाली (vascular system) पर क्या असर पड़ता है और बदलते पर्यावरण के प्रति ये ऊंचे पेड़ कैसे अनुकूलन करते हैं। 

अध्ययन में पाया गया कि ऊंचे पेड़ों में सूखे के दौरान पानी की आपूर्ति के लिए कुछ अंदरूनी बदलाव हुए थे। लंबे पेड़ों के तनों के निचले हिस्से वाली जल वाहिकाएं (ज़ायलम) (xylem) छोटे पेड़ों की तुलना में दुगनी चौड़ी थीं – चौड़ी वाहिकाएं होने से घर्षण कम हुआ और पानी के ऊपर पहुंचने में रुकावट भी कम हुई।

आम तौर पर सूखे की स्थिति में पेड़ों की जल वाहिकाओं में हवा के बुलबुले (air space) बन जाते हैं, जिससे पानी के स्थानांतरण में रुकावट पैदा होती है। इस प्रक्रिया को ‘एम्बोलिज़्म’ (embolism) कहते हैं। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने नमूनों वाले ऊतकों में एम्बोलिज़्म के लक्षण कृत्रिम रूप से पैदा करके उनके निर्जलीकरण (dessication) की सीमा का परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि छोटे और ऊंचे पेड़ों के ऊतक एम्बोलिज़्म के प्रति एक जैसी ही प्रतिक्रिया दे रहे थे। जिससे यह साबित हुआ कि पेड़ की ऊंचाई और एम्बोलिज़्म जैसी परिस्थिति का इनके सूखे के प्रति संवेदनशीलता से कोई सीधा सम्बंध नहीं हैं। अलबत्ता, छोटे पेड़ों की तरह ही ये बड़े पेड़ भी एम्बोलिज़्म से खुद-ब-खुद निपट रहे थे।

इसके साथ ही यह भी देखा गया कि इन विशाल पेड़ों के ऊपरी भाग की पत्तियां, निचले भाग की पत्तियों के मुकाबले सूखा सहन करने में ज़्यादा सक्षम थीं। ये पत्तियां पानी की भारी कमी होने पर भी मुरझाने की बजाय प्रकाश संश्लेषण (photosyntesis) की प्रक्रिया कर पा रही थीं।

इस निष्कर्ष को और भी गहराई से समझने के लिए वैज्ञानिकों ने एल नीनो (el nino) से प्रभावित हुए 42 अन्य डिप्टेरोकार्प पेड़ों को जांचा। परिणाम चौंकाने वाले थे। सूखे से निपटने के लिए ऊंचे और छोटे पेड़ों की वृद्धि समान रूप से धीमी हुई थी। ऐसे ही एक अन्य अध्ययन में यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के पारिस्थितिकीविद एड्रियन दास ने पाया था कि सूखे के हालात में पेड़ों की ऊंचाई की बजाय कीट या बीमारियों के प्रकोप जैसे अन्य बाहरी कारणों का असर ज़्यादा होता है।

पेड़ों में पानी के पहुंचने की प्रक्रिया बहुत ही जटिल और अनोखी है, जिसका सटीक अंदाज़ा सिर्फ पेड़ की ऊंचाई से नहीं लगाया जा सकता। यह प्रक्रिया विशेष ऊतकों (जिन्हें ज़ाइलम कहा जाता है) के माध्यम से होती है। इस प्रक्रिया में एक से अधिक तंत्र शामिल होते हैं, जैसे – परासरण (osmosis) के द्वारा जड़ों द्वारा पानी सोखा जाना, पत्तियों के पर्णरंध्रों (स्टोमैटा) (stomata) से होने वाले वाष्पोत्सर्जन की वजह से उत्पन्न खिंचाव (ट्रांसपिरेशनल पुल), जड़ों द्वारा आरोपित दाब (रूट प्रेशर), और केशिका क्रिया (केपिलरी एक्शन)। ये सब मिलकर पानी को गुरुत्वाकर्षण (gravitational force) के विरुद्ध पेड़ के ऊपरी भाग तक पहुंचाते हैं।

अब तक वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन के चलते विशाल पेड़ों को सूखे के प्रति कमज़ोर मानते आ रहे थे। लेकिन इस अध्ययन ने वैज्ञानिकों को चेताया है कि केवल पेड़ की लंबाई नापकर यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि वह सूखा झेल सकेगा या नहीं। साथ ही, यह भी फिलहाल स्पष्ट नहीं है कि अन्य वंशों के पेड़ भी सूखे से निपटने के लिए ऐसे ही बदलाव अपनाते हैं या नहीं। इसलिए वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर पर वन संरक्षण के मॉडल (forest conservation models) तैयार करते समय नए तरीके अपनाने होंगे। बहरहाल, सूखे में इन विशाल पेड़ों का इस मज़बूती से टिके रहना एक सकारात्मक संकेत है। आखिरकार, ये विशाल पेड़ जंगलों के फेफड़े और रीढ़ हैं। (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit: https://media.istockphoto.com/id/2211647702/photo/foggy-morning-at-danum-valley-rain-forest-in-lahad-datu-sabah.jpg?s=612×612&w=0&k=20&c=_ZAZZIpc2EApA9eaygc_Hqdd4496manNogVKOyuXTc0=

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