डॉ. इरफान ह्यूमन

मनुष्यों ने सदियों से आकाश की ओर देखकर ब्रह्माण्ड (universe) के रहस्यों को समझने का प्रयास किया है। दूरबीनों के आविष्कार से लेकर आधुनिक अंतरिक्ष वेधशालाओं (Modern Space Laboratories) तक विज्ञान ने हमें ब्रह्माण्ड की अद्भुत झलक दिखाई है। इसी क्रम में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की नैन्सी ग्रेस रोमन अंतरिक्ष दूरबीन खगोल विज्ञान के इतिहास में एक मील का पत्थर बनने जा रही है। यह अत्याधुनिक अंतरिक्ष दूरबीन ब्रह्माण्ड के विस्तार, डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और हमारे सौरमंडल से बाहर स्थित ग्रहों (एक्सोप्लैनेट) के बारे में नई जानकारियां प्रदान करेगी।
इस दूरबीन का नाम प्रसिद्ध अमेरिकी खगोलविद नैन्सी ग्रेस रोमन (Nncy grace roman) के सम्मान में रखा गया है। नैन्सी ग्रेस रोमन को आधुनिक अंतरिक्ष खगोल विज्ञान की अग्रदूत माना जाता है। उन्हें अक्सर हबल स्पेस टेलीस्कोप की जननी (Mother of Hubble) कहा जाता है क्योंकि उन्होंने हबल मिशन की अवधारणा और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
नैन्सी ग्रेस रोमन अंतरिक्ष दूरबीन का प्राथमिक दर्पण (प्राइमरी मिरर) 2.4 मीटर व्यास का है, जो हबल अंतरिक्ष दूरबीन के दर्पण के बराबर है। हालांकि इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्यंत विशाल दृष्टि क्षेत्र (फील्ड ऑफ व्यू) है, और यह हबल की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक क्षेत्र को एक साथ देख सकती है।
प्रमुख उपकरण
यह दूरबीन 21वीं सदी की सबसे उन्नत अंतरिक्ष वेधशालाओं में से एक है। इसमें मुख्य रूप से दो वैज्ञानिक उपकरण लगाए गए हैं – वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट (WFI) तथा कोरोनाग्राफ इंस्ट्रूमेंट (CGI)।
1. वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट: इस दूरबीन का मुख्य वैज्ञानिक उपकरण है। यह एक अत्याधुनिक निकट-अवरक्त (नीयर इन्फ्रारेड) कैमरा और स्पेक्ट्रोस्कोपिक प्रणाली (Spectroscopic system) है, जो 0.5 से 2.3 माइक्रॉन तरंगदैर्घ्य के प्रकाश का अध्ययन करती है। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:
300 मेगापिक्सेल का कैमरा
0.281 वर्ग डिग्री का विशाल दृष्टि क्षेत्र
इमेजिंग तथा स्लिटलेस स्पेक्ट्रोस्कोपी, दोनों की सुविधा
अत्यंत संवेदनशील अवरक्त डिटेक्टर
विशाल खगोलीय सर्वेक्षणों के लिए उपयुक्त
डब्ल्यूएफआई के मुख्य उप घटक
(क) फोकल प्लेन ऐरे: यह डब्ल्यूएफआई का ‘हृदय’ (Heart of WFI) है। इसमें 18 उन्नत H4RG-10 डिटेक्टर लगे हैं। प्रत्येक डिटेक्टर से कुल मिलाकर लगभग 300 मेगापिक्सेल का चित्रण संभव होता है।
(ख) इमेजिंग फिल्टर प्रणाली: डब्ल्यूएफआई में 8 वैज्ञानिक फिल्टर लगाए गए हैं। इन फिल्टरों की सहायता से वैज्ञानिक विभिन्न तरंगदैर्घ्यों 9wavelength) पर निहारिकाओं, तारों और निहारिकाओं का अध्ययन कर सकेंगे।
(ग) ग्रिज़्म: ग्रिज़्म, दरअसल ग्रेटिंग और प्रिज़्म का संयुक्त रूप है। इसका काम प्रकाश को विभिन्न रंगों (वर्णक्रम) में विभाजित करना, निहारिकाओं की दूरी और गति मापना और ब्रह्माण्ड के विस्तार (Universal expansion) की दर निर्धारित करना है।
(घ) लो-रिज़ोल्यूशन प्रिज़्म: इसका उपयोग मंद एवं अत्यधिक दूरस्थ निहारिकाओं का अध्ययन, प्रारंभिक ब्रह्माण्ड के अवलोकन और डार्क एनर्जी सर्वेक्षणों (Drak energy survey) में सहायता करना है।
2. कोरोनाग्राफ इंस्ट्रूमेंट: यह एक तकनीकी प्रदर्शन उपकरण है जिसे तारों के प्रकाश को अवरुद्ध करने और दूरस्थ एक्सोप्लैनेट (Exoplanet) की सीधी छवि प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
सामान्यत: कोई ग्रह अपने तारे की तुलना में अरबों गुना कम चमकदार होता है। इसलिए ग्रह सीधे दिखाई नहीं देते। सीजीआई विशेष तकनीकों की सहायता से तारे के प्रकाश को दबाकर ग्रहों को देखने योग्य बनाता है।
कोरोनाग्राफ की प्रमुख तकनीकें
(क) कोरोनाग्राफ मास्क: विशेष रूप से निर्मित सूक्ष्म ऑप्टिकल मास्क (optical mask) तारे के प्रकाश को अवरुद्ध करते हैं। इसका लाभ ग्रहों को सीधे देखने में सहायता, तारकीय प्रकाश के प्रभाव को कम करना और ग्रहों के वायुमंडल का अध्ययन करना है।
(ख) डिफॉर्मेबल मिरर: ये ऐसे दर्पण हैं जिनका आकार अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर बदला जा सकता है। इनका कार्य प्रकाशीय विकृतियों को दूर करना, चित्रों की स्पष्टता बढ़ाना और ग्रहों की पहचान को सटीक बनाना है।
(ग) वेवफ्रंट सेंसिंग एवं नियंत्रण प्रणाली: इसका कार्य प्रकाशीय त्रुटियों का पता लगाना, स्वतः सुधार करना और उच्च कंट्रास्ट वाली छवियां प्राप्त करना है।
(घ) इलेक्ट्रॉन मल्टीप्लाइंग सीसीडी डिटेक्टर: ये अत्यंत संवेदनशील डिटेक्टर होते हैं। ये बहुत कम प्रकाश को भी रिकॉर्ड कर सकते हैं।
मानवता के लिए महत्व
1. ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और विकास को समझने में मदद: एक बड़ा प्रश्न रहा है – ‘ब्रह्माण्ड कैसे बना और यह कैसे विकसित हो रहा है।’ रोमन अंतरिक्ष दूरबीन (Roman space telescope) अरबों निहारिकाओं का अध्ययन करके ब्रह्माण्ड का एक विशाल त्रि-आयामी मानचित्र (3-D structure) तैयार करेगी। इससे वैज्ञानिक यह समझ सकेंगे कि बिग बैंग (Big bang) के बाद ब्रह्माण्ड कैसे विकसित हुआ, निहारिकाएं कैसे बनीं और समय के साथ उनकी संरचना में क्या परिवर्तन हुए। इस प्रकार रोमन दूरबीन हमें अपने ब्रह्माण्डीय इतिहास को समझने में सहायता करेगी।
2. डार्क एनर्जी और डार्क मैटर के रहस्य को समझना: वर्तमान वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार ब्रह्माण्ड का लगभग 68 प्रतिशत भाग डार्क एनर्जी से बना है। यह एक रहस्यमयी शक्ति है जो ब्रह्माण्ड के विस्तार को लगातार तेज़ कर रही है। आज तक वैज्ञानिक यह नहीं जानते कि डार्क एनर्जी वास्तव में क्या है? इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? यह भविष्य में ब्रह्माण्ड को किस दिशा में ले जाएगी? रोमन अंतरिक्ष दूरबीन लाखों सुपरनोवा 9supernova) तथा अरबों निहारिकाओं का अध्ययन करके डार्क एनर्जी के व्यवहार को समझने में सहायता करेगी। यदि डार्क एनर्जी का रहस्य सुलझ जाता है, तो यह आधुनिक भौतिकी की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक होगा।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ब्रह्माण्ड का लगभग 27 प्रतिशत भाग डार्क मैटर से बना है, लेकिन इसे प्रत्यक्ष रूप से कभी नहीं देखा गया है। रोमन अंतरिक्ष दूरबीन गुरुत्वीय लेंसिंग तकनीक (gravitational lensing technique) का उपयोग करके डार्क मैटर के वितरण का मानचित्र तैयार करेगी। इससे वैज्ञानिक समझ सकेंगे कि डार्क मैटर कहां स्थित है। यह निहारिकाओं को कैसे प्रभावित करता है और ब्रह्माण्ड की संरचना में इसकी क्या भूमिका है। यह अध्ययन आधुनिक खगोल विज्ञान और कण भौतिकी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
3. पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज: क्या ब्रह्माण्ड में पृथ्वी के अतिरिक्त कहीं और जीवन मौजूद है? यह प्रश्न सदियों से मानव जिज्ञासा का विषय रहा है। रोमन अंतरिक्ष दूरबीन हज़ारों नए एक्सोप्लैनेट्स की खोज करेगी। इनमें से कुछ ग्रह अपने तारों के रहने योग्य क्षेत्र में हो सकते हैं, जहां तरल जल की उपस्थिति संभव है।
इन खोजों से पृथ्वी जैसे ग्रहों की संख्या का अनुमान लगाया जा सकेगा, जीवन की संभावनाओं (life expectency) का अध्ययन होगा, भविष्य के अंतरतारकीय अभियानों (interstellar mission) की दिशा तय होगी। यदि किसी ग्रह पर जीवन के संकेत मिलते हैं, तो यह मानव इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक होगी।
4. मानव ज्ञान की सीमाओं का विस्तार: इतिहास बताता है कि प्रत्येक बड़ी वैज्ञानिक खोज ने मानव सोच को बदल दिया है। कॉपरनिकस ने बताया था कि पृथ्वी ब्रह्माण्ड का केंद्र नहीं है। गैलीलियो ने दूरबीन से आकाश का अध्ययन किया। हबल ने दिखाया था कि हमारी आकाशगंगा (galaxy) अकेली निहारिका नहीं है। जेम्स वेब दूरबीन ने प्रारंभिक ब्रह्माण्ड की झलक दिखाई थी।
उसी प्रकार रोमन अंतरिक्ष दूरबीन मानव ज्ञान की सीमाओं को और आगे बढ़ाएगी। यह हमें उन प्रश्नों के उत्तर खोजने में मदद करेगी जिनके बारे में आज केवल अनुमान लगाए जाते हैं।
5. विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को गति: अंतरिक्ष मिशनों के लिए विकसित तकनीकें अक्सर पृथ्वी पर भी उपयोगी सिद्ध होती हैं। भविष्य में इन तकनीकों का उपयोग चिकित्सा, दूरसंचार, रक्षा, मौसम विज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान में किया जा सकता है। इस प्रकार यह मिशन अप्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन की गुणवत्ता (quality of life) को भी बेहतर बनाएगा।
6. अगली पीढ़ी के वैज्ञानिकों को प्रेरणा: बड़े वैज्ञानिक मिशन केवल अनुसंधान ही नहीं करते, बल्कि नई पीढ़ी को प्रेरित भी करते हैं। रोमन अंतरिक्ष दूरबीन विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि अवश्य बढ़ाएगी।
7. अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा: आधुनिक अंतरिक्ष अनुसंधान किसी एक देश का कार्य नहीं है। रोमन मिशन में कई देशों के वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान शामिल हैं। लिहाज़ा, यह मिशन वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को मज़बूत करेगा, ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाएगा और मानवता को साझा वैज्ञानिक लक्ष्यों की ओर प्रेरित करेगा।
रोमन अंतरिक्ष दूरबीन में प्रयुक्त कई तकनीकें भविष्य के मिशनों के लिए परीक्षण मंच (टेक्नॉलोजी डिमांस्ट्रेशन) का कार्य करेंगी। विशेष रूप से इसका कोरोनाग्राफ इंस्ट्रूमेंट (coronagraph instrument) भविष्य में ऐसी दूरबीनों के निर्माण का आधार बनेगा जो पृथ्वी जैसे बाह्यग्रहों की प्रत्यक्ष तस्वीरें ले सकें। इस प्रकार रोमन मिशन आने वाले दशकों के अंतरिक्ष अनुसंधान की नींव रखेगा।
अतः रोमन अंतरिक्ष दूरबीन केवल एक दूरबीन नहीं है, बल्कि यह ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, विकास और भविष्य को समझने का एक शक्तिशाली साधन भी है। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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