
दुनिया भर के शहरी और जंगली पेड़ों पर भारी आक्रमण हो चुका है। एक कीट विशालकाय पेड़ों को तेज़ी से तबाह करने पर तुला है। साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक एक छोटे से भृंग (बीटल) की आक्रामक प्रजाति दक्षिण अफ्रीका की ‘ओक सिटी’ (oak city)कहे जाने वाले स्टेलनबोश शहर के ऐतिहासिक और विशाल इंग्लिश ओक पेड़ों को तबाह करने के बाद अब कैलिफोर्निया, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के पेड़ों को अपना शिकार बना रही है।
पोलीफेगस शॉट-होल बोरर (Euwallacea fornicatus) (polyphagous shot hole borer beetle) भृंग मात्र 2 मि.मी. लंबा (तिल बराबर) होता है। मूल रूप से पूर्वी एशिया (चीन, वियतनाम) में पाए जाने वाला यह कीट पिद्दा होने के कारण जाने-अनजाने लकड़ी के सामान, पैकेजिंग खोकों और पौधों के आयात-निर्यात के ज़रिए दुनिया भर में अपनी जड़ें जमा चुका है।
मादा भृंग पेड़ के तनों में बारीक सुराख करके अंडे देती है और साथ में एक सहजीवी कवक छोड़ देती है। इस कवक के फलकाय (fungal fruiting bodies) को नवजात भृंग भोजन के रूप में लेते हैं। लेकिन नवजात भृंगों (infant beetels) द्वारा बनाई गई संकरी सुरंगे और कवक की लगातार वृद्धि से पेड़ की जल प्रणाली पूरी तरह ठप हो जाती है, और धीरे-धीरे पेड़ का तना भुरभुरा होकर सूख जाता है।
चिंताजनक बात यह है कि इस भृंग की केवल एक मादा ही संक्रमण फैलाने के लिए काफी होती है। क्योंकि मादा के अनिषेचित अंडों (unfertilized egg) से नर भृंग पैदा होते हैं, जो उसी मादा से प्रजनन कर सकते हैं। मादा कीट उड़कर अन्य स्वस्थ पेड़ों को संक्रमित कर सकती है, जबकि नर भृंग उड़ नहीं पाते और उसी पेड़ पर बने रहते हैं।
शॉट-होल बोरर जैसी कई प्रजातियां हैं, जिनके बीच अंतर करना लगभग नामुमकिन है। इसी कारण लगभग एक दशक तक यह कीट कैलिफोर्निया में मौजूद होने के बावजूद ओझल रहा। शुरुआती दौर में, भ्रमवश इसे ‘टी शॉट-होल बोरर’ (Euwallacea perbrevis) मान लिया गया था। अब शोधकर्ताओं ने डीएनए अनुक्रमण की मदद से दोनों प्रजातियों में अंतर स्पष्ट कर लिया है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि ये भृंग अपने मूल स्थानों से कम से कम छह बार दूसरे देशों तक पहुंच चुके हैं। यह भी अनुमान है कि भविष्य में ये भूमध्य सागर के इलाकों, दक्षिण-पूर्वी अमेरिका, मेडागास्कर, और पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में तबाही मचा सकते हैं। वन कीटविज्ञानी नकामुराकारे इसे पेड़ों के लिए ‘उभरते भयानक तूफान’ के तौर पर देखते हैं।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में 2021 में इसकी रोकथाम के लिए चार करोड़ डॉलर और पांच हज़ार संक्रमित पेड़ों की बलि चढ़ चुकी है। फिर भी इस कीट का खात्मा नहीं हो पाया। वैसे इस कीट और कवक की जोड़ी देखने के बाद रोकथाम के नए उपाय मिलने की उम्मीद है।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि समय रहते इस पर काबू नहीं किया गया तो यह कैलिफोर्निया की सेंट्रल वैली के फलदार पेड़ों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। (स्रोत फीचर्स)
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