
छह टांगें, दो एंटीना और तीन खंडों में बंटा शरीर – यह किसी भी कीट (insect) की बुनियादी पहचान मानी जाती है। लेकिन क्या धरती पर प्रकट हुए शुरुआती कीट भी बिलकुल ऐसे ही थे?
जैव विकास के सिद्धांतों के मुताबिक, पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत समुद्र से हुई और धीरे-धीरे जीव ज़मीन पर आ बसे। माना जाता है कि कीटों के पूर्वज समुद्री जीव क्रस्टेशियन (जैसे झींगा और क्रिल) (crustacean) थे, लेकिन वे समुद्र से निकलकर ज़मीनी जीव कैसे बने यह सवाल अनसुलझा ही था। अब नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन ने कीटों की उत्पत्ति के राज़ उजागर किए हैं।
लगभग पांच वर्ष पहले, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के जीवाश्म वैज्ञानिक एरिक टिहेल्का का ध्यान 32.4 करोड़ साल पुराने एक जीवा श्म के रेखाचित्र (fossil sketch) पर गया। यह 1985 में टेक्सास के टेसनस फॉर्मेशन से मिले एक जीवाश्म का रेखाचित्र था। उस समय वैज्ञानिकों ने इसे किसी क्रस्टेशियन (झींगा प्रजाति) का शिशु माना था और सैन डिएगो नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम में रख दिया था।
लेकिन जब टिहेल्का की टीम ने ध्रुवीकृत प्रकाश (polarized light) तकनीक से इसका पुनरावलोकन किया, तो कई अनदेखे तथ्य उभरे। उन्होंने पाया कि इस जीव में कीट और क्रस्टेशियन दोनों के गुण थे।
बारीकी से निरीक्षण में उन्होंने पाया कि जीव के बीच वाले हिस्से में कीटों की तरह छह टांगें, सिर पर दो एंटीना, शरीर के पिछले भाग में 11 खंडों वाला पिछला भाग था और तंतुनुमा पूंछ तथा अंडे देने की नली थी। इसके अलावा पिछले भाग पर क्रस्टेशियन जीवों की तरह ढेरों चप्पू जैसी टांगें भी थीं। शोधकर्ताओं ने इस नए जीव का नाम चोशा प्रेकर्सर (Chosha praecursor) रखा है।
वैज्ञानिकों की यह राय रही है कि कीटों के पूर्वज समुद्री क्रस्टेशियन थे। यह नया जीवाश्म स्पष्ट संकेत देता है कि ये जीव अचानक ज़मीन पर आने के बजाय जल-थल दोनों जगह (semi-aquatic) विचरते होंगे। अनुमान है कि चप्पूनुमा टांगें इसे पानी में तैरने या गलफड़ों की तरह सांस लेने में मदद करती होंगी।
इसके बाद टिहेल्का की टीम ने स्कॉटलैंड और इलिनॉय से मिले ऐसे ही तीन रहस्यमयी जीवाश्मों का भी अध्ययन किया। इनमें से स्कॉटलैंड का जीवाश्म करीब 40.5 करोड़ साल पुराना था (जिसे कनखजूरा या गोजर का रिश्तेदार माना जाता था) (millipede), जबकि इलिनॉय के दो जीवाश्म करीब 30 करोड़ साल पुराने थे, जिनके उदर पर भी टांगों जैसी संरचनाएं थी। इन चारों जीवाश्मों के अध्ययन से पता चलता है कि शुरुआती पंखहीन कीटों (wingless insects) के शरीर की बनावट और टांगों की संख्या में काफी विविधता थी।
गौरतलब, विकासक्रम में कई टांगों वाले ये शुरुआती जीव विलुप्त (extinct) होते गए। लेकिन इनकी एक शाखा में केवल छह टांगें बची रहीं और उसी से आधुनिक भृंग, मधुमक्खियों, तितलियों का विकास हुआ।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अध्ययन कीटों की उत्पत्ति और उनके क्रमिक विकास (insect evolution) की हमारी पुरानी समझ को बदल सकता है। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit: https://www.sciencedaily.com/images/1920/carboniferous-stem-insect-chosha-praecursor.webp