अधिकांश सांप अंडे देते हैं, हालांकि कुछ सांप हैं जो बच्चे भी पैदा करते हैं। लेकिन यहां बात करेंगे सांपों के भ्रूण के विकास की एक खूबी की।
देखा गया है कि विकास के दौरान जब सांप के भ्रूण की लंबाई बढ़ती है तो वह सीधा नहीं बढ़ता बल्कि कुंडली मार लेता है। आम तौर पर यह कुंडली क्लॉकवाइस (यानी घड़ी की सुई घूमने की दिशा में) घूमती है। करंट बायोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में इन दोनों चीज़ों की व्याख्या प्रस्तुत की गई है – कुंडली क्यों बनती है और एक ही दिशा में क्यों घूमती है?
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 34 प्रजातियों के सांपों के विकसित होते भ्रूणों का अवलोकन किया। पाया गया कि कुल मिलाकर 65 प्रतिशत भ्रूणों में कुंडली क्लॉकवाइस बनी थी। यह भी देखा गया कि शुरुआती अवस्था में क्लॉकवाइस कुंडली ज़्यादा आम थी।
फिर शोधकर्ताओं ने केप हाउस स्नेक (Boaedon capensis) का ज़्यादा बारीकी से अध्ययन किया। देखा गया कि सारे 146 भ्रूणों में कुंडलियां क्लॉकवाइस थीं। दूसरी ओर, अन्य ऐसी ही गैर-सर्प नलिकाकार प्रजातियों में कुंडलियां क्लॉकवाइस और एंटीक्लॉकवाइस दोनों लगभग बराबर थीं।
सांप के भ्रूण की कुंडलियों के राज़ का खुलासा तब हुआ जब शोधकर्ताओं ने भ्रूण की आंतरिक त्री-विमीय संरचना को देखा। इसके लिए उन्होंने एक्स-रे चित्रण की एक विशेष तकनीक माइक्रो-सीटी स्कैनिंग का उपयोग किया। पता चला कि सांप के बढ़ते भ्रूण में शरीर की लंबाई तो तेज़ी से बढ़ती है और वह उसकी आहार नाल की वृद्धि को पीछे छोड़ देती है। अब छोटी रह गई आहार नाल बढ़ते शरीर को पीछे खींचती है। इस खींचतान का परिणाम होता है कि शरीर में ऐंठन आ जाती है – वह कुंडली का आकार ग्रहण कर लेता है।
दूसरा सवाल था कि इस कुंडली के घुमाव की दिशा क्लॉकवाइस ही क्यों होती है। इसका सम्बंध भ्रूण में योक थैली की स्थिति से है। सांप के भ्रूण में यह थैली भ्रूण के बाईं ओर स्थित होती है, तो शरीर इसके विपरीत दिशा में घूम जाता है।
यह शोध वैज्ञानिकों के एक अंतर्राष्ट्रीय दल द्वारा किया गया था। शोध पत्र की प्रमुख लेखक ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के एलेक्ज़ेंड्रा वेबर ने कहा है कि प्रकृति में कई कुंडलियां पाई जाती हैं (जैसे घोंघों की खोल या हमारी अपनी आंत) और यह अध्ययन इन्हें समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। (स्रोत फीचर्स)