इस वर्ष के इगनोबेल हकदार

प्रतिका गुप्ता

नोबेल पुरस्कार (nobel prize) से तो सभी वाकिफ हैं। यह विज्ञान के क्षेत्र में संजीदगी से किए गए अहम शोधकार्य के लिए दिया जाता है, जिसमें सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ-साथ वैज्ञानिकों को गोल्ड मेडल और लगभग 10 लाख डॉलर की राशि भी मिलती है। यह भी सर्वमान्य है कि डीएनए की संरचना का खुलासा करना शोध का एक महत्वपूर्ण विषय है। लेकिन क्या आपको लगता है कि नाक छिनकना भी शोध का विषय हो सकता है?

नोबेल पुरस्कार के विपरीत, इगनोबेल पुरस्कार उतनी ही संजीदगी से किए गए ऐसे शोधकार्यों के लिए दिए जाते हैं जो पहले पल में तो लोगों को गुदगुदाते हैं लेकिन दूसरे ही पल लोगों को विचार करने पर मजबूर करते हैं। वास्तव में, इगनोबेल (Ig Nobel) पुरस्कार ‘ignoble’ शब्द पर तंज है जिसका मतलब होता है अप्रतिष्ठित। लेकिन, इगनोबेल पुरस्कार पाने वाले को भी काफी प्रतिष्ठा मिलती है, भले ही नकद राशि न मिलती हो। ये पुरस्कार इस बात को रेखांकित करते हैं कि महज भारी-भरकम और संजीदा लगने वाले विषय ही अहम नहीं होते और सिर्फ उन्हीं पर संजीदगी से शोधकार्य नहीं किए जाते, बल्कि हमारे मन में उठने वाले छोटे-छोटे सवाल भी उतने ही अहम होते हैं और उनके जवाब उतनी ही संजीदगी (scholarly diligence) से खोजना होते हैं।

इस वर्ष भी एनल्स ऑफ इंप्रॉबेबल जर्नल ने 10 क्षेत्रों में इन शोधकार्यों को इगनोबेल के सम्मान से नवाज़ा है। खुद देखिए कि बात कहां से निकलकर कहां तक पहुंच सकती है।

1. बायोमैकेनिक्स: चुंबन की वैज्ञानिक परिभाषा

इस वर्ष बायोमैकेनिक्स का इगनोबेल पुरस्कार मैटिल्डा ब्रिंडल, कैथरीन टैलबोट और स्टुअर्ट वेस्ट को चुंबन की एक सटीक वैज्ञानिक परिभाषा (kissing definition) देने के लिए मिला है। इस परिभाषा के अनुसार “चुंबन एक ऐसी गैर-आक्रामक क्रिया है जिसमें एक ही प्रजाति के जीवों के बीच मुंह-से-मुंह (या होंठ-से-होंठ) का सीधा संपर्क हो, होंठो/मुंह में कुछ हलचल हो और यह संपर्क या हलचल भोजन के खाने-खिलाने के लिए न हो।” न सिर्फ मनुष्यों बल्कि कई प्रजातियों में इस तरह का व्यवहार देखा गया है जिसमें दो जीवों के बीच मुंह से मुंह का संपर्क होता है; चुंबन को सटीक रूप से परिभाषित करने से इसे विभिन्न प्रजातियों के बीच बेहतर समझा जा सकेगा और इसके उद्भव और कारणों के बारे में सोचा जा सकेगा। शोधकर्ताओं की उक्त परिभाषा के अनुसार अब तक ज्ञात जीवों में ध्रुवीय भालू, कुछ पक्षी, चींटियां और कुछ अन्य प्राइमेट भी चुंबन करते हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाने की कोशिश की कि यह व्यवहार कब विकसित हुआ। उन्होंने पाया है कि यह व्यवहार लगभग 2.5 करोड़ साल पहले वानरों (एप्स) के पूर्वजों से आया है। अब समझना बाकी है कि इस व्यवहार की भूमिका क्या है।

2. अर्थशास्त्र: अमीरी और अनैतिक व्यवहार 

अर्थशास्त्र का इगनोबेल पुरस्कार पॉल पिफ और उनके साथियों को उस शोध के लिए मिला है जिसमें उन्होंने सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अनैतिक व्यवहार के बीच सम्बंध की पड़ताल की है। उन्होंने पाया कि गरीबों की तुलना में अमीर लोग (wealthy people) अधिक अनैतिक व्यवहार करते हैं। ये निष्कर्ष उनके द्वारा किए गए सात अध्ययनों के आधार पर दिए गए हैं। पहले दो अध्ययनों में उन्होंने इन दोनों वर्गों के लोगों का व्यवहार चौराहे पर वाहन चलाते समय देखा; उन्होंने पाया कि अमीर लोग चौराहे पर अपनी बारी आने के पहले ही दूसरे वाहनों से आगे निकलने की कोशिश करते हैं। तीसरे अध्ययन में प्रतिभागियों को कुछ परिस्थितियां देकर उन पर उनकी प्रतिक्रिया पूछी गई – अमीर लोगों ने अधिक अनैतिक निर्णय लिए। चौथे अध्ययन में सिर्फ और सिर्फ बच्चों के लिए रखी कैंडी को अमीरों की भूमिका निभा रहे प्रतिभागियों ने अधिक लिया। पांचवे अध्ययन में बातचीत के दौरान अपनी बात मनवाने के लिए झूठ बोलने की प्रवृत्ति अमीरों में अधिक दिखी। छठवे अध्ययन में खेल जीतने के लिए चीटिंग करने का व्यवहार अमीरों में अधिक दिखा। और सातवें अध्ययन में कार्यस्थल पर अमीर अधिक अनैतिक व्यवहार (unethical behaviour) करते पाए गए।

3. रसायन विज्ञान: प्रोटीन से भरपूर कॉकरोच का दूध

रसायन विज्ञान का इगनोबेल पुरस्कार उस शोध के लिए मिला जिसमें वैज्ञानिकों ने बताया कि Diploptera punctata नामक कॉकरोच का दूध (cockroch milk) गाय के दूध से भी तीन गुना अधिक पौष्टिक है। यह कॉकरोच आम घरों में मिलने वाले कॉकरोच से अलग है और अंडे देने की बजाय बच्चों को जन्म देता है। दरअसल, मादा कॉकरोच अपने शरीर में विकसित हो रहे भ्रूणों को एक विशेष पोषक तरल से भोजन देती है। भ्रूण जब इस तरल को ग्रहण करते हैं तो उनकी आंत में यह प्रोटीन, वसा और शर्करा से भरपूर छोटे-छोटे क्रिस्टलों के रूप में जमा हो जाता है। ये क्रिस्टल धीरे-धीरे घुलकर बढ़ते भ्रूण को पोषण देते हैं।

2016 में भारतीय और फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी की मदद से इन क्रिस्टलों की संरचना का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि यह तरल अत्यधिक पौष्टिक है: यह गाय के दूध की तुलना में तीन गुना से अधिक पोषण और ऊर्जा दे सकता है। घबराइए नहीं, वैज्ञानिक सीधे इस दूध उपयोग मनुष्य के इस्तेमाल के लिए नहीं सोच रहे हैं, बल्कि इसके घटकों के आधार पर पोषक पेय (nutritious drink) तैयार करने का विचार है।

4. चिकित्सा: नाक कैसे छिनकें

चिकित्सा का इगनोबल पुरस्कार जापानी चिकित्सक टोकुजी उन्नो के 1977 के उस अध्ययन के लिए मिला है जिसमें उन्होंने बताया था कि नाक कैसे साफ करें। रोज़ाना नाक की सफाई श्वासनली और फेफड़ों के संक्रमण के जोखिम को कम करती है, और जब सर्दी-ज़ुकाम होता है तो नाक तो छिनकनी पड़ती है। उन्नो यही जानना चाह रहे थे कि किस तरह नाक की सफाई (nostril hygiene) स्वस्थ रहने में मदद कर सकती है। इसके लिए उन्होंने देखा कि कितनी तेज़ी और ताकत से हवा बाहर करने पर, एक बार में एक नथुने से छिनकने पर, या दोनों नथुनों से छिनकने पर नाक की सफाई में क्या अंतर पड़ता है। उन्होंने यह सब 14 से 48 वर्ष की आयु के 15 लोगों पर करके देखा। नाक से निकलने वाली हवा की गति मापने के लिए दो न्यूमोटैकोमीटर (pnuemotachometer) लगाए गए और नाक से निकली हवा की मात्रा तथा समय भी दर्ज किया गया। साथ ही कान की बाहरी नलिका में दबाव परिवर्तन को एक कैथेटर और संवेदनशील प्रेशर ट्रांसड्यूसर से मापा गया। उन्होंने पाया कि दोनों नथुने खुले रखते हुए नाक साफ करने की बजाय एक बार में एक नथुने को खुला रखकर नाफ साफ करने से ज़्यादा अच्छे से सफाई होती है।

5. जीव विज्ञान: सांप कब काट सकता है

यह तो कहा ही जाता है कि सांप तभी काटता है जब आपका पैर उस पर पड़ जाए। जीव विज्ञान का इगनोबेल पुरस्कार उस अध्ययन के लिए दिया गया जिसमें शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि विषैले सांप पर पांव कहां पड़ने पर उसके द्वारा काटने की संभावना अधिक होती है। उन्होंने ब्राज़ील के विषैले सांप पिट वाइपर (pit viper snake) के व्यवहार का अध्ययन किया और उसकी लंबाई, लिंग, उम्र, तापमान, दिन का समय तथा मनुष्य द्वारा दी गई उत्तेजनाओं जैसे कारकों को देखा। प्रयोगों में सांपों के साथ नियंत्रित मानव-संपर्क की परिस्थितियां बनाई गईं और यह देखा गया कि कहां पांव पड़ने पर सांप रक्षा के लिए काटता (defensive snakebite) है। पाया गया कि सिर पर पांव पड़ने पर काटने की संभावना लगभग 44 प्रतिशत थी, शरीर के बीच के हिस्से पर 20 प्रतिशत और पूंछ पर 11 प्रतिशत थी। छोटे सांपों, विशेषकर नवजातों में काटने की प्रवृत्ति भी अधिक पाई गई। हालांकि पशु-नैतिकता सरोकारों के चलते इस अध्ययन को साइंटिफिक रिपोर्ट्स ने फरवरी 2025 में वापस ले लिया।

6. भौतिकी: छींटे-मुक्त युरिनल 

भौतिकी का इगनोबेल पुरस्कार ऐसे युरिनल डिज़ाइन (splash-free urinal design) करने के लिए दिया है जिससे आसपास फैलने वाले छींटे और गंदगी न के बराबर फैलें। शोधकर्ताओं ने ऐसा अनुभव किया था कि कितनी भी सावधानी से युरिनल में पेशाब की जाए, आसपास के फर्श पर छींटे फैल ही जाते हैं और सार्वजनिक शौचालयों की सफाई का मुद्दा बना रहता है। यदि सफाईकर्मी हर व्यक्ति के जाने के बाद सफाई करते रहें तो यह उनके लिए भी थकाऊ होता है, और सफाई बरकरार रखने में संसाधन, पैसा और ऊर्जा भी लगती ही है। इसी के समाधान में उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि छींटे छिटककर बाहर आते ही क्यों हैं और इस आधार पर नए युरिनल डिज़ाइन पेश किए; इन डिज़ाइन का नाम उन्होंने नॉटी-लू (Nauti-Loo), कॉर्नुकोपिया (Cornucopeea) और यूरिन-नो (Urine-no) नाम दिए हैं। इसके लिए उन्होंने किसी तरल के सतह से टकराने के कोण और छींटों के उचकने के बीच के सम्बंध का गणितीय मॉडल बनाया और पाया कि किसी सतह पर किसी तरल की जितनी सीधी धार (90 डिग्री के कोण से) पड़ेगी छींटे उतने ज़्यादा छिटकते हैं, सतह पर धार यदि कम कोण (30 डिग्री से कम) से टकराए तो छींटे कम उछलते हैं। इसके आधार पर उन्होंने तिरछी सतहों वाले तीन युरिनल डिज़ाइन तैयार किए और उनका परीक्षण किया। नई डिज़ाइनों से प्रचलित युरिनल की तुलना महज़ 1.4 प्रतिशत छींटे बाहर आए।

7. तकनीक: मच्छर की सूंडी से 3-डी प्रिंटिंग

तकनीक का इगनोबेल पुरस्कार वैज्ञानिकों की उस कोशिश को मिला जिसमें मरी हुई मादा मच्छर की सूंड को 3-डी प्रिंटर की बेहद सूक्ष्म नोज़ल के रूप में इस्तेमाल किया गया। मच्छर की सूंड बहुत पतली होने के साथ काफी मज़बूत भी होती है। कई कीटों के सूंड (मुखांगों) की संरचना और यांत्रिक गुणों की तुलना करने पर मादा मच्छर की सूंड सबसे उपयुक्त लगी। उन्होंने प्रयोगशाला में पाले गए मृत मच्छरों से सूंड अलग करके डिस्पेंसिंग नोज़ल से जोड़ा और डायरेक्ट-इंक-राइटिंग 3-डी प्रिंटर (direct-ink-writing 3-D printer) में लगाया और अलग-अलग गति संयोजन से प्रिंट करके देखा। उन्होंने पाया कि इस नोज़ल व्यवस्था से लगभग 20 माइक्रोमीटर पतली लकीरें प्रिंट की जा सकती हैं, जो आम व्यावसायिक नोज़लों की तुलना में काफी पतली लकीरें हैं।

8. घ्राण विज्ञान: संतान की गंध 

घ्राण विज्ञान का इगनोबेल पुरस्कार उस अध्ययन को मिला है जिसमें शोधकर्ताओं ने यह जांचा कि माता-पिता अपनी संतानों के शरीर की गंध को अलग-अलग उम्र में किस तरह महसूस करते हैं। पोलैंड में किए गए अध्ययन में 235 माता-पिता ने कुल 367 संतानों के शरीर की गंध की सुखदता (pleasing body odor) का आकलन किया। संतानों की उम्र एक महीने से 35 वर्ष तक थी। प्रतिभागियों ने अपनी संतानों की गंध को 0 से 20 के पैमाने पर बेहद बुरी से बहुत अच्छी तक अंक दिए। शोधकर्ताओं ने संतानों की उम्र, माता-पिता और संतान का लिंग, साथ बिताया समय तथा माता-पिता और-संतान के बीच सम्बंध जैसे कारकों को भी विश्लेषण में शामिल किया। पाया गया कि संतान की उम्र बढ़ने के साथ उसके शरीर की गंध को सुखद मानने की प्रवृत्ति घटती गई। शिशुओं की गंध को 93.7 प्रतिशत माता-पिता ने सुखद या बहुत सुखद बताया, जबकि किशोरावस्था से बड़ी संतानों के लिए यह आंकड़ा 75.2 प्रतिशत था। शोधकर्ताओं का कहना है कि माता-पिता और बच्चों के बीच सम्बंधों में गंध की भूमिका हो सकती है।

9. शांति: दुश्मन का दुश्मन दोस्त क्यों

शांति का इगनोबेल पुरस्कार उस शोध को मिला जिसमें वैज्ञानिकों ने दोस्ती और दुश्मनी के बीच एक दिलचस्प सामाजिक मनोविज्ञान का अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं ने छह अध्ययनों में कुल 1183 प्रतिभागियों से पूछा कि वे अपने आदर्श दोस्त (ideal friend) में क्या गुण चाहते हैं। प्रतिभागी अमेरिका और भारत के छात्र तथा सामान्य समुदाय के थे। उनसे यह भी पूछा गया कि उनका दोस्त उनके साथ, किसी अजनबी के साथ या उनके दुश्मन के साथ कैसा व्यवहार करे तो उन्हें ठीक लगेगा। सामान्य स्थिति में लोगों ने दयालु और भरोसेमंद दोस्त को अधिक पसंद किया। लेकिन जब सवाल किसी दुश्मन के प्रति व्यवहार का था, तो तस्वीर बदल गई। कुछ प्रतिभागियों ने ऐसे दोस्त को पसंद किया जो उनके दुश्मन के प्रति थोड़ा रूखा और सख्त रवैया रखते हों। शोधकर्ताओं ने इसे “embedded dyad” यानी दोस्ती को व्यापक सामाजिक नेटवर्क के भीतर देखने के दृष्टिकोण से समझाया। कोई दोस्त केवल हमारे साथ ही ताल्लुक नहीं रखता बल्कि वह हमारे प्रतिद्वंद्वियों से भी मिलता-जुलता है, जिसका अप्रत्यक्ष असर हम पर पड़ सकता है।

10. मृदा विज्ञान: जांघियों से मिट्टी की सेहत 

मृदा विज्ञान का इगनोबेल पुरस्कार मिट्टी में दबाए गए सूती जांघियों और टी-बैग्स के ज़रिए मिट्टी की जैविक सक्रियता और गुणवत्ता (soil biological activity & quality) का अध्ययन करने के लिए मिला है। विचार सरल था: मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव जितने सक्रिय होंगे, सूती कपड़े जैसे जैविक पदार्थ की अपघटन गति उतनी ही तेज़ होगी। शोधकर्ताओं ने शौकिया वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे मानकीकृत सूती जांघिए और टी-बैग्स वगैरह अपने आसपास की विभिन्न तरह की मिट्टियों (जैसे बाग-बगीचे, मैदान, खेत आदि) में गाड़ दें और लगभग दो महीने बाद उन्हें निकालें, ताकि यह देखा जा सके कि कपड़ा कितना सड़-गल गया और कितना बाकी है। दुनिया भर के  लगभग 1000 शौकिया वैज्ञानिकों ने 2000 से अधिक जांघिए और हज़ारों टी-बैग्स दफनाए। पाया गया कि निजी बगीचों, जहां पेड़-पौधों की प्रजातियों में विविधता थी, में कपड़ा सबसे अधिक तेज़ी से अपघटित हुआ, जबकि लॉन (जिस पर सिर्फ एक तरह के पौघे – हरी घास या दूब – उगी थी) में अपघटन (decomposition) धीमी गति से हुआ। मिट्टी की गुणवत्ता के लिहाज़ से यह अहम है।

चलते–चलते

विगत 3 सितंबर को स्विट्जरलैंड के ज़्यूरिख में इस वर्ष के इगनोबेल पुरस्कार दिए गए। अपने 36 वर्ष के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब एनल्स ऑफ इंप्रोबेबल ने यह समारोह बोस्टन के बाहर आयोजित किया गया। इसका कारण पिछले दो वर्ष का अनुभव रहा: विगत दो सालों में अमेरिका में सख्त किए गए वीज़ा नियमों और विभिन्न देशों के बीच चल रहे युद्ध एवं संघर्ष के चलते कई विजेता चाहकर भी समारोह में शामिल नहीं हो पा रहे थे। और, इगनोबेल पुरस्कार के संस्थापक मार्क अब्राहम्स (mark abrahams) के लिए यह चिंता का विषय था कि यह समारोह जो हल्के-फुल्के और मज़ेदार अंदाज़ में सम्पन्न होता है उस पर संघर्ष और नीतियां हावी हो रही हैं, विजेता शामिल नहीं हो पा रहे हैं और मेहमानों के लिए देश का दौरा करना असुरक्षित हो गया है।

इस वर्ष विजेता तो शामिल हो ही पाए, साथ ही समारोह में नोबेल पुरस्कार विजेता एशर डफलो, अभिजीत बनर्जी, मिशेल मेयर एवं टिम हंट भी शामिल रहे जिन्होंने इगनोबेल पुरस्कार विजेताओं को मशरूम-आकार की ट्रॉफी दी। आमंत्रित अतिथियों ने 24/7 की तर्ज पर व्याख्यान भी दिए: तयशुदा विषय पर पहले तो 24 सेकंड में और फिर 7 शब्दों में विषय समझाया गया। समारोह की शुरुआत ‘लैबोरेटरी ऑफ स्मॉल डिसास्टर’ की थीम पर डांस परफॉर्मेंस हुई, फंजाई थीम पर ओपेरा संगीत (fungi themed opera)सम्पन्न हुआ, और समारोह का समापन दर्शकों ने कागज़ के हवाई-जहाज़ उड़ाकर किया। हर इवेंट की शुरुआत फोर-पीस ऑर्केस्ट्रा द्वारा की गई, और विजेताओं की वेशभूषा उनके शोध विषय से सम्बंधित थी।

अगले वर्ष ये पुरस्कार बेल्जियम के एंटवर्प (antwerp) में 5 सितंबर को दिए जाएंगे। आप यदि दर्शकों में शामिल होना चाहें तो मई में टिकट बुकिंग उनकी वेबसाइट पर प्रारंभ होगी। और, आप चाहें तो किसी मज़ेदार लेकिन संजीदा शोध को अगले वर्ष के लिए नामित (nominate) भी कर सकते हैं, क्या पता आपका नामित शोध पुरस्कार पा जाए। (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit: https://img.jagranjosh.com/images/2026/09/04/template/image/IG-Nobel-Prize-Winners-1788535061753.webp

प्रातिक्रिया दे