अर्पिता व्यास

मच्छर मलेरिया सहित कई रोगों का वाहक है। एक अनुमान के मुताबिक 2024 में दुनिया के 80 देशों में मलेरिया के पौने तीन करोड़ से ज़्यादा मामले सामने आए थे और इसकी वजह से 6 लाख से अधिक मौतें हुई थीं। मलेरिया के प्रमुख वाहक मच्छर एनॉफिलीज़ प्रजातियों के होते हैं। मलेरिया पर नियंत्रण का एक प्रमुख तरीका मच्छरों पर नियंत्रण का रहा है। इसके लिए कीटनाशकों (insecticide) का व्यापक उपयोग भी किया गया है।
1950 के दशक में मलेरिया की रोकथाम के लिए डाइएल्ड्रिन नामक कीटनाशक का छिड़काव किया गया था। यह एनॉफिलीज़ मच्छर को मारता था। लेकिन कुछ ही सालों में इसका असर होना बंद हो गया क्योंकि डाइएल्ड्रिन छिड़काव के बाद वही मच्छर जिंदा बचे जिनमें Rdl (resistance to dieldrin) जीन में उत्परिवर्तन मौजूद था और उनकी संख्या बढ़ने लगी। प्रतिरोध पैदा हो जाने के कारण डाइएल्ड्रिन का उपयोग बंद कर दिया गया। साथ ही डाएल्ड्रिन की विषाक्तता को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई थीं।
दशकों बाद भी मच्छरों में इनमें से एक उत्परिवर्तन बना रहा। क्योंकि इस उत्परिवर्तन का एक असर यह भी था कि यह इन मच्छरों को डाइएल्ड्रिन के अलावा अन्य कीटनाशकों के खतरे से भी सुरक्षा प्रदान करता था। Rdl मच्छरों में डाइएल्ड्रिन एक रिसेप्टर (GABA receptor) पर काम करता है। अन्य कई कीटनाशक भी इसी रिसेप्टर को निशाना बनाते हैं। लेकिन साथ ही यह उत्परिवर्तन उनकी सक्रियता को कम करता था।
अब एक नए अध्ययन ने इस मामले में और प्रकाश डाला है। अपने मूल रूप में Rdl कई जंतुओं की संवेदनाओं को मंद करता है। यह देखा गया कि एनॉफिलीज़ मच्छरों में यह उनकी आवाज़ के प्रति संवेदना को मंद करता है। लेकिन उत्परिवर्तन के बाद इसकी यह भूमिका जाती रही और परिणामस्वरूप उत्परिवर्तित Rdl वाले मच्छर आवाज़ों के प्रति अधिक संवेदनशील (auditory sensitivity) हो गए। गौरतलब है कि मच्छर संभोग के लिए साथी की तलाश के लिए मुख्यत: ध्वनि संकेतों का सहारा लेते हैं। नर मच्छर मादा के पंखों की हल्की फड़फड़ाहट पर ध्यान देकर साथी ढूंढते हैं। ध्वनि संवेदना बढ़ जाने पर वे शहरी इलाकों के शोर में भी अपने लिए साथी ढूंढ लेते हैं। यानी यह उत्परिवर्तन ज़हर से तो बचाता ही है, साथी ढूंढने में भी मददगार (mating advantage) होता है।
स्पैनिश नेशनल रिसर्च काउंसिल की न्यूरोबायोलॉजिस्ट मार्टा एंड्रेस ने इसकी जांच करने के लिए प्रयोग किए। उन्होंने अपने प्रयोगों में पाया था कि Rdl वह जीन है जिसमें उत्परिवर्तन से डाइएल्ड्रिन-प्रतिरोध (dieldrin resistance) पैदा होता है। यह जीन मूल रूप में मच्छर की श्रवण तंत्रिकाओं की सक्रियता को कम करता है। Rdl में उत्परिवर्तन होने से श्रवण तंत्रिकाएं ज़्यादा क्रियाशील हो जाती हैं। यानी वे मादा मच्छरों के पंखों की फड़फड़ाहट की ध्वनि को बेहतर सुन पाते हैं। बारी आई प्रयोगशाला में अध्ययन की।
उन्होंने एक स्पीकर से 300–550 हर्ट्ज़ आवृत्ति की आवाज़ पैदा जो मादा के पंखों की फड़फड़ाहट के लगभग समान थी। प्रयोग में देखा गया कि Rdl उत्परिवर्तित (Rdl mutated mosquitoes) नर मच्छरों की स्पीकर पर पहुंचने की संभावना अपेक्षाकृत ज़्यादा थी।
लेकिन मादा को खोज लेने का मतलब यह नहीं माना जा सकता कि नर उनके साथ संभोग (successful mating) में भी सफल होंगे। इसकी जांच के लिए शोधकर्ताओं ने 25 नर मच्छरों को 25 मादाओं के साथ छोटे पिंजरों में रखा, फिर उन्हें 48 घंटे के लिए दो अलग-अलग इनक्यूबेटर में रखा – एक में शोर 70 डेसीबल का था और दूसरे में 93 डेसीबल का (लगभग शहरों जैसा) था। दोनों परिस्थितियों उत्परिवर्तित मच्छरों में तो संभोग लगभग बराबर (40 प्रतिशत) रहा जबकि गैर-उत्परिवर्तित मच्छरों में यह दर ज़्यादा शोर वाले इन्क्यूबेटर में घटकर 33 प्रतिशत रह गई।
इस प्रयोग से स्पष्ट निष्कर्ष निकालने में एक समस्या यह है कि मच्छरों और हम मनुष्यों में ध्वनि संवेदना के ढंग थोड़े अलग-अलग हैं। जहां मनुष्य मूलत: ध्वनि स्रोत से उत्पन्न दबाव की तंरगों का सहारा लेते हैं, वहीं मच्छर ध्वनि स्रोत के आसपास कणों के कंपनों को भांपते हैं। इस वजह से दोनों मामलों में शोर को परिभाषित करने में अंतर होगा।
शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्षों की जांच वास्तविक परिस्थिति में भी की है। उन्होंने पाया कि शोरगुल वाले परिवेश में उत्परिवर्तन की दर ज़्यादा थी। और तो और, जिन मादाओं में यह उत्परिवर्तन नहीं था उनमें संभोग करने की संभावना ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शोर भरे शहरों में कम थी। अलबत्ता, सीधे-सीधे कोई निष्कर्ष निकालना मुश्किल है क्योंकि शहरी और ग्रामीण परिवेश में और भी कई अंतर होते हैं।
कीटनाशक का उपयोग समाप्त होने के लंबे समय बाद भी उत्परिवर्तन की निरंतरता का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यदि हम कुछ समय के लिए किसी कीटनाशक का उपयोग करते हैं और जेनेटिक बदलाव (genetic modifications) कर देते हैं, तो जीवों की शारीरिक क्रिया में परिवर्तन आ जाता है। यह वास्तव में पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बिगाड़ देता है। यहां एक और महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है: एक जीन में होने वाले परिवर्तन दो अलग-अलग तरह के प्रभाव दर्शा सकते हैं। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit: https://www.science.org/do/10.1126/science.z2v2318/full/_20260804_on_mosquito_breeding.jpg