भरत नागेश

हमारे शरीर की हर कोशिका में मौजूद DNA में लगभग 20 हज़ार से ज़्यादा जीन्स होते हैं, लेकिन हर जीन हर समय सक्रिय नहीं रहता। शरीर का सही ढंग से विकास और कामकाज तभी संभव हो पाता है जब सही जीन, सही समय पर और सही जगह पर ‘ऑन’ हों। तो, यह कौन तय करता है कि कौन सा जीन कब ऑन होगा? इसका जवाब DNA के उन खास हिस्सों में छिपा है जो जीन्स को सक्रिय करने का संकेत देते हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अब कृत्रिम बुद्धि (AI) की मदद से इसी छिपे हुए ‘जेनेटिक स्विच’ (genetic switch) को डिकोड करने में बड़ी सफलता हासिल की है।
रहस्यमयी इनिशिएटर
वैज्ञानिकों ने डीएनए के जिस भाग पर शोध किया, उसे इनिशिएटर (initiator) कहते हैं। यह वह जगह है जहां से किसी जीन में मौजूद जानकारी को प्रतिलेखन-अनुलेखन के माध्यम से प्रोटी न या किसी अन्य ज़रूरी अणु में बदलने की प्रक्रिया शुरू होती है। दूसरे शब्दों में कहें, तो इनिशिएटर वह स्टार्ट बटन है, जो तय करता है कि जीन की गतिविधि कहां से शुरू होगी। यह जीन अभिव्यक्ति (gene expression) की पूरी प्रक्रिया की नींव माना जाता है, क्योंकि शरीर में एंज़ाइम, हॉर्मोन और तमाम ज़रूरी प्रोटीन इसी प्रक्रिया के ज़रिए बनते हैं।
अब तक वैज्ञानिकों के लिए यह एक बड़ी पहेली रही है कि आखिर डीएनए की अरबों क्षार-जोड़ियों (base pairs) में इस इनिशिएटर को ठीक-ठीक कैसे पहचाना जाए। इसकी बनावट इतनी जटिल और विविधतापूर्ण थी कि पारंपरिक तरीकों से इसका पूरा पैटर्न समझना मुश्किल हो रहा था।
खोज प्रक्रिया
इस शोध का नेतृत्व कैलिफोर्निया के मॉलीक्यूलर बायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर जेम्स टी. कैडोनागा (James T. Kadonaga) और ग्रेजुएट रिसर्चर टॉरी राइन-कैरिग (Torrey Rhyne-Carrigg) ने किया। टीम ने सबसे पहले हाई-थ्रूपुट अनुक्रमण (High-throughput DNA sequencing) तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डीएनए के लगभग 5,00,000 अलग-अलग वैरिएंट अनुक्रम तैयार किए और उनकी गतिविधि को मापा। इस तकनीक की मदद से एक साथ बहुत बड़ी संख्या में डीएनए अनुक्रम को तेजी से पढ़ा जा सकता है।
इसके बाद इन आंकड़ों का इस्तेमाल एक मशीन लर्निंग मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया गया। इस मॉडल ने लाखों अनुक्रमों का विश्लेषण करके यह सीखा कि इनिशिएटर की पहचान करने वाला क्षार-जोड़ी पैटर्न (base pair pattern) आखिर होता क्या है। यह मॉडल पहली बार मानव जीन्स में इनिशिएटर की उपस्थति या अनुपस्थिति का सटीक अनुमान लगाने में सफल रहा, और लगभग 60 प्रतिशत मानव जीन्स में इस इनिशिएटर को सफलतापूर्वक पहचान लिया गया।
प्रोफेसर कैडोनागा के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी एआई मॉडल ने डीएनए में मौजूद इनिशिएटर की मौजूदगी का इतना मज़बूत और भरोसेमंद अनुमान दिया है। इसके आधार पर डीएनए के इस क्षार अनुक्रम पैटर्न को असल मायनों में डिकोड (decode) किया जा सका।
खोज का महत्व
यह शोध सिर्फ अकादमिक जिज्ञासा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक और चिकित्सकीय पहलू भी हैं:
1. बीमारियों को समझने में मदद: जब इनिशिएटर जैसे नियामक क्षेत्रों में उत्परिवर्तन होता है, तो जीन की गतिविधि गड़बड़ा सकती है, जिससे कोशिकाओं में खराबी आ सकती है। यह गड़बड़ी कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों से जुड़ी मानी जाती है। अब वैज्ञानिक इस नए मॉडल की मदद से यह अनुमान लगा सकेंगे कि कोई खास उत्परिवर्तन इनिशिएटर को कैसे प्रभावित करेगा और उससे जीन गतिविधि (gene activtiy) में क्या बदलाव आ सकता है।
2. सिंथेटिक प्रमोटर डिज़ाइन करना: इस शोध से मिले आंकड़े भविष्य में सिंथेटिक प्रमोटर डिज़ाइन करने में मदद कर सकते हैं। ये ऐसे कृत्रिम डीएनए अनुक्रम (artificila DNA sequences) होते हैं जिन्हें खास मकसद के हिसाब से जीन्स को चालू या बंद करने के लिए तैयार किया जाता है। इनका इस्तेमाल जीन थेरपी, बायोटेक्नोलॉजी और सिंथेटिक बायोलॉजी जैसे क्षेत्रों में हो सकता है।
3. जीनोम की समझ: मानव जीनोम में सिर्फ जीन्स ही नहीं, बल्कि उन्हें नियंत्रित करने वाले असंख्य नियामक घटक भी मौजूद हैं। इन घटकों को डिकोड करना पूरे जीनोम की भाषा (genome understanding) को समझने की दिशा में एक अहम कदम है।
वास्तविक प्रयोग और कृत्रिम बुद्धि का मेल
डीएनए का यह चालू-बंद स्विच (DNA switch) दशकों से एक पहेली बना हुआ था। इस अध्ययन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें पारंपरिक प्रयोगों और कृत्रिम बुद्धि (एआई) की आधुनिक तकनीक, दोनों को साथ लाया गया। पहले वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में बड़े पैमाने पर आंकड़े जुटाए और फिर उस एक एआई मॉडल को इन आंकड़ों के आधार पर प्रशिक्षित किया ताकि वह पैटर्न पहचान सके। यह तरीका भविष्य में जीनोम की अन्य उलझनों को समझने के लिए भी एक मॉडल के तौर पर काम आ सकता है।
आगे की राह
हालांकि इस शोध ने लगभग 60 प्रतिशत मानव जीन्स में इनिशिएटर को पहचान लिया है, फिर भी बाकी बचे जीन्स में इनकी पहचान करना अभी बाकी है। वैज्ञानिकों का अगला लक्ष्य होगा कि वे मॉडल (model) को और बेहतर बनाएं, ताकि बाकी जीन्स में भी इनिशिएटर या उससे मिलते-जुलते नियामक घटकों को खोजा जा सके। इसके अलावा, यह समझना भी ज़रूरी होगा कि अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं और ऊतकों में यह स्विच किस तरह अलग-अलग व्यवहार करता है। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit: https://www.sciencedaily.com/images/1920/biological-dna-structure-with-gene-mutation.webp