
लीप ईयर, अधिक मास वगैरह के बारे में सुनते रहते हैं। यह भी स्पष्ट है कि ऐसी व्यवस्थाएं सूर्य-चंद्रमा की आभासी गति और समय मापन की अपनी प्रणाली के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए ज़रूरी होती हैं। लेकिन आजकल के उपकरणों/यंत्रों का कामकाज समय के अत्यंत सटीक मापन पर टिका होता है। इसके लिए 1963 में परमाणु घड़ियों (nuclear clock) पर आधारित समय मापन को मानक निर्धारित किया गया था। लेकिन…
हमें इस समय मानक का तालमेल पृथ्वी की गति से बनाकर रखना ज़रूरी होता है। जब यह समय मानक (समन्वित सार्वभौमिक समय – UTC) निर्धारित किया गया, उसके बाद पृथ्वी की घूर्णन गति धीमी पड़ती गई। परमाणु घड़ियां तो अपनी रफ्तार से चलती रहीं और पृथ्वी की गति से निर्धारित दिवस और परमाणु घड़ी से निर्धारित दिवस की अवधि में अंतर आने लगा। इनका तालमेल बनाए रखने के लिए सबसे पहले 1972 में अंतर्राष्ट्रीय भार व माप ब्यूरो (BIPM) ने UTC में एक सेकंड जोड़ा था। इसे लीप सेकंड (Leap second) कहते हैं। एक बार फिर, लेकिन…
यह जुगाड़ प्राय: समस्यामूलक रहा है। लीप सेकंड जोड़ने से कंप्यूटर प्रणालियों पर काफी असर होता है क्योंकि यहां संदेश भेजने और प्राप्त करने का समय एकदम सटीक होना ज़रूरी है। लीप सेकंड जोड़ने के कई असर देखे गए हैं।
1972 से शुरू करके अब तक 27 लीप सेकंड जोड़े जा चुके हैं। अंतिम लीप सेकंड 2016 में जोड़ा गया था। इसके बाद पृथ्वी की घूर्णन गति एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगी है। इसके चलते 2016 के बाद लीप सेकंड नहीं जोड़ा गया है। और, अब पता चला है कि पृथ्वी की घूर्णन गति (earth’s rotation) में वृद्धि काफी तेज़ रही है। बात यहां तक पहुंची है कि दुनिया के समयपाल ऋणात्मक लीप सेकंड जोड़ने पर विचार करने लगे हैं। पता नहीं, ऐसा करने के क्या असर होंगे।
दरअसल, हर चार वर्षों में भार और माप के आम सम्मेलन में दुनिया भर के समयपाल (global timekeepers) जुटकर UTC पर विचार करते हैं। 2022 में 64 सदस्य राष्ट्र इस बात पर सहमत हो गए थे कि UTC और पृथ्वी की स्थिति के बीच जो अंतर आ रहा है, उसे 2035 तक 1 सेकंड से ज़्यादा होने तक चलने दिया जाए।
अलबत्ता, ताज़ा अनुमान बताते हैं कि ऋणात्मक लीप सेकंड की ज़रूरत शायद 2035 से पहले ही पड़ने वाली है। 2026 का अंतर्राष्ट्रीय भार और माप सम्मेलन अक्टूबर में प्रस्तावित है। यहां संभवत: लीप सेकंड की बजाय लीप घंटे (leap hour) की बात उठेगी क्योंकि कई विशेषज्ञों का मत है कि लीप घंटा जोड़ने की ज़रूरत शायद सैकड़ों वर्षों में एक बार पड़ेगी। कई विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निर्णय जल्दी करना होगा क्योंकि यदि और इन्तज़ार किया तो मुमकिन है कि 2035 में ऋणात्मक लीप सेकंड (negative leap second) जोड़ना ही पड़े। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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