क्या एआई को सारा मज़ा लूटने देंगे?

कृत्रिम बुद्धि यानी एआई आजकल बहुत प्रचलित लफ्ज़ बन गया है। इसका मतलब यह माना जाने लगा है कि मशीनें सोचने-विचारने, विश्लेषण करने, निष्कर्ष निकालने वगैरह सारे काम कर डालेंगी। और कई कंपनियां एआई के क्षेत्र में बढ़-चढ़कर निवेश कर रही हैं। इसी प्रवृत्ति के मद्देनज़र नेचर पत्रिका ने अपने पाठकों का एक सर्वेक्षण किया था कि वे अपने काम के कौन-से हिस्से एआई को सौंप देंगे और कौन-से हिस्से अपने हाथों में ही रखना चाहेंगे। कुछ पाठकों की प्रतिक्रियाएं देखने से लगता है कि अनुसंधान में लगे अधिकांश लोग अपने काम का आनंद अपने पास ही सुरक्षित रखना चाहेंगे। इनमें से कुछ प्रतिक्रियाएं देखिए।

इस्तांबुल (तुर्की) के मुलेक ओज़्कामेक (Müleyke Özçakmak) का कहना था कि वे एआई और चेतना के क्षेत्र में अनुसंधान करते हैं और उनके विचार से सबसे रोमांचक हिस्सा है जिज्ञासु रहना, अनपेक्षित कड़ियां देखना और मौजूदा मान्यताओं को चुनौती देना। ऐसे क्षण प्राय: मार्गदर्शक के साथ बातचीत, सहकर्मियों के साथ चर्चाओं और खुद मनन करने से आते हैं, न कि किसी एल्गोरिद्म से।

मेक्सिको सिटी (मेक्सिको) के एल्वा एस्कोबार (Elva Escobar) गहरे समुद्र के शोधकर्ता हैं। उनके विचार से खोज का रोमांच और प्रयोग डिज़ाइन करने की सृजनात्मकता को एआई के सुपुर्द करना मुश्किल होगा। बातचीत के लिए गहरे समुद्र से एक निजी जुड़ाव होना ज़रूरी है। इसके अलावा उनका कहना है कि विज्ञान में उनकी एक नैतिक जवाबदेही भी है।

मेनचेस्टर (यूके) की ल्यूसी न्जोकी न्जुकी (Lucy Njoki Njuki) जैव-सांख्यिकी (बायो-स्टेटिस्टिक्स) में प्रशिक्षित हैं और उन्हें गड्ड-मड्ड आंकड़ों के साथ काम करना और उन्हें साफ-सुथरे ढंग से प्रस्तुत करना इतना आनंददायक लगता है कि यह काम वे खुद करना चाहेंगी।

पीटरमार्टिज़बर्ग (दक्षिण अफ्रीका) के रिचर्ड कुंज़ (Richard Kunz) कहते हैं कि हालांकि कोड लिखने में एआई की कुशलता मुझमें ईर्ष्या पैदा करती है, लेकिन फिर भी मैं खुद कोड लिखना पसंद करता हूं। मुझे अपने काम के इस हिस्से से प्रेम है। वैसे भी एआई द्वारा लिखित कोड मुश्किल होते हैं और उन्हें डीबग करने (यानी गलत अंशों को सुधारने) में बहुत वक्त ज़ाया होता है।

हॉन्गकॉन्ग के शेंग बाओ (Sheng Bao) कहते हैं कि वैज्ञानिक प्रगति सिर्फ उत्तर पा लेने का नाम नहीं है। इसमें दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान, मान्यताओं को चुनौती देना, और वार्तालाप के ज़रिए विचारों/धारणाओं का विकास करना भी शामिल है। कई सारे उम्दा अनुसंधान विचार नाहक चर्चाओं से उभरते हैं।

पोर्टो एलेग्रे (ब्राज़ील) के एनरिके फाल्सेटो डी बोरोस (Enrique Falceto De Barros) का मत है कि एक डॉक्टर और स्वास्थ्य सम्बंधी शोधकर्ता होने के नाते वे मरीज़ के हित को सबसे ऊपर रखते हैं। लिहाज़ा, यदि एआई कोई काम उनसे बेहतर कर सकता है, तो उस काम में उसे उनका स्थान ले लेना चाहिए। यह विचार डरावना है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि एआई उनकी भूमिका को सुदृढ़ करेगा, उनका स्थान नहीं लेगा। वह दूसरों की देखभाल करने की उनकी चाहत, उनके मानवीय स्पर्श, जिज्ञासा-प्रेरित अनुसंधान की जगह नहीं लेगा। वह अन्य लोगों के साथ जुड़कर सृजन करने के आनंद और स्वास्थ्य-समता में सुधार की नैतिक ज़रूरत को भी समाप्त नहीं करेगा।

फोर्ट कोलिन्स (कोलेरेडो) की एना हॉडशायर (Anna Hodshire) का मत है कि वे नहीं चाहेंगी उनका लेखन और समीक्षा का कार्य कोई चैटबॉट छीन ले। लिखने से उन्हें वे पहलू पकड़ में आते हैं जो वे अन्यथा नहीं समझतीं। अन्य लोगों के काम की समीक्षा से उन्हें आलोचनात्मक सोच में मदद मिलती है। उनका तो यहां तक कहना है कि उबाऊ इमेल लिखते हुए भी उन्हें संवाद के अपने हुनर को तराशने में मदद मिलती है।

बेजिंग (चीन) के लिआओ मेंगचाओ (Liao Mengchao) का कहना है कि वे प्रारंभिक डैटा संग्रह, वास्तविक स्थल पर अवलोकन करने और रूबरू साक्षात्कार खुद करने को तरजीह देते हैं। इसमें गहरे सवालों वाली प्रश्नावलियों और मैदानी सर्वेक्षण करना तथा चिकित्सा उपचार पा रहे लोगों से बातचीत करना शामिल होता है। इन कामों के लिए हमदर्दी, लचीलापन, तत्काल रिस्पॉन्स और आमने-सामने की चर्चाएं शामिल हैं। एआई प्रत्यक्ष जानकारी जुटाने के लिए वास्तविक दुनिया के परिदृश्यों तक पहुंच नहीं बना सकता। लिहाज़ा, वे इस काम को एल्गोरिद्म के भरोसे कदापि नहीं छोड़ना चाहेंगे।

हैनोवर (जर्मनी) के फ्रांज़िस्का मुलर (Franziska Müller) कहते हैं कि वे प्रस्तुतीकरण के लिए रेखाचित्र बनाना या पोस्टर, प्रकाशन की रचना करना एआई के सुपुर्द नहीं करेंगे। किसी डिज़ाइन के घटकों का मिलान करना या उन्हें किसी तस्वीर में सही तरह से जोड़ना, ताकि एक बेतरतीबी में तरतीब पैदा हो जाए, और एक कहानी सुनाना अपने आप में बहुत संतोषप्रद होता है।

तालसेरी (भारत) की अदिति अनिल (Adithi Anil) संज्ञान मनोविज्ञान में पीएच.डी. कर रही हैं। यह विषय इंसानों से, उनके दिमागों से और इस बात से ताल्लुक रखता है कि वे अपने पर्यावरण से कैसे अंतर्क्रिया करते हैं। हो सकता है कि एआई के साधन कोडिंग, प्रयोग की डिज़ाइन और आंकड़ों के विश्लेषण को तेज़ कर दें, लेकिन जोखिम यह रहेगा कि हम दिमाग और व्यवहार के उस अनोखे झरोखे को गंवा दें, जो एक इंसानी शोधकर्ता के साथ आते हैं।

नेशविले, टेनेसी की एलेना इवान्स (Elena Evans) को लगता है कि विज्ञान को व्यापक श्रोताओं तक ले जाना इंसानों पर छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्हें पेचीदा विषयों को लोगों तक सृजनात्मक ढंग से संप्रेषित करने में आनंद मिलता है और वे यह काम एआई को सौंपना नहीं चाहेंगी।

रिगा (लाटविया) की एग्नेस उसाका (Agnese Ušacka) आंकड़ों का विश्लेषण छोड़ना नहीं चाहेंगी। वे कहती हैं कि ज़रा उस रोमांच की कल्पना कीजिए जो महीनों या बरसों तक आंकड़े जुटाने के बाद तब मिलता है जब पता चलता है कि वे आंकड़े आपकी परिकल्पना की पुष्टि करते हैं। वे मानती हैं पूरी प्रक्रिया के इस सबसे मज़ेदार हिस्से को एआई को सौंप देना नासमझी होगी। (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
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