
जलचर स्तनधारियों को सिटेशियन कहते हैं। इनमें व्हेल, डॉल्फिन तथा पॉरपॉइज़ शामिल हैं। और इनमें भी वैज्ञानिक देखते आए हैं कि डॉल्फिन का भोजन हासिल करने का तरीका बहुत विचित्र है। आम तौर पर डॉल्फिन करती यह है कि किसी मछली का पीछा करेंगी। वे उस मछली को खाएंगी नहीं बल्कि उसने जो शिकार पकड़ा है उसे छीनकर खा जाएंगी? इसे चोर-परजीविता या क्लेप्टोपैरासिटिज़्म कहते हैं। 2015 में जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के समुद्री जीव वैज्ञानिक जेनेट मैन ने बताया था कि ऑस्ट्रेलिया की शार्क बे में उन्होंने देखा है कि एक डॉल्फिन ने तीन पनकौओं की चोंच से मछली छीन ली। लेकिन समुद्री जीवों में यह व्यवहार बहुत कम देखने को मिलता है।
और अब तो इन्तहा हो गई है। एक डॉल्फिन विशेष (जिसे स्थानीय लोग बबल्स कहते हैं) ने अजीब व्यवहार का प्रदर्शन किया है। बबल्स किसी मछली का पीछा करेगी और फिर वह उसकी कै को चट कर जाएगी। सनशाइन कोस्ट विश्वविद्यालय की समुद्री जीव वैज्ञानिक एशिया आर्मस्ट्रॉन्ग को बबल्स के बारे में जानकारी 2017 में दक्षिणी ग्रेट बैरियर रीफ के लेडी एलियट द्वीप के नज़दीक बनाए गए एक वीडियो से मिली थी। यह एक बॉटलनोज़ डॉल्फिन (टर्सिओप्स ट्रन्केटस – Tursiops truncatus) थी। आर्मस्ट्रॉन्ग की टीम ने आगे खोजबीन की।
जून 2021 से अक्टूबर 2025 के बीच इस टीम ने बिगआई ट्रेवेली मछली (Caranx sexfasciatus) के झुंड में शिकार करती बबल्स की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया। हालांकि डॉल्फिन कभी-कभार मछलियां खाती हैं लेकिन यहां सारी मछलियों को छोड़कर डॉल्फिन एक के पीछे पड़ गई। उसने ट्रेवेली का काफी नज़दीक से तब तक पीछा किया किया जब तक कि वह उल्टी करके भाग नहीं गई। तब उस डॉल्फिन ने वह कै खा डाली। और तो और, इस डॉल्फिन ने अगले तीस मिनट में यही वारदात 10 अन्य ट्रेवेली मछलियों के साथ दोहराई।
उसने मछली को खाने की बजाय उसके उल्टी करने का इन्तज़ार क्यों किया, इस मामले में आर्मस्ट्रॉन्ग ने एक परिकल्पना प्रस्तुत की है। हो सकता है कि अतीत में बबल्स उस ट्रेवेली को खाने के इरादे से ही झपटती रही होंगी लेकिन जब उसका पचा-पचाया भोजन (वमन) मिल गया तो उन्होंने रास्ता बदल लिया। वैसे भी ट्रेवेली काफी बड़ी होती है और उसे चबाने, हजम करने में समय और मेहनत लगती होगी। उसके मुकाबले उल्टी को संभालना ज़्यादा आसान साबित हुआ होगा।
अलबत्ता, इस चोर-परजीविता में भी बबल्स ने मेहनत तो की थी। ट्रेवेली समूह से उलझने से पहले बबल्स ने अपने सिर को दाएं-बाएं करते हुए क्लिक की ध्वनि उत्पन्न की। उसके बाद एक अकेली ट्रेवेली का पीछा करते वक्त उसने बार-बार क्लिकिंग ध्वनि निकाली और कई सारी निम्न आवृत्ति की ध्वनियां भी पैदा कीं। डॉल्फिन अपनी आवाज़ की प्रतिध्वनि की मदद से मछली के आकार, आकृति और संघटन में बारीक फर्क का अंदाज़ा लेती हैं। आर्मस्ट्रॉन्ग की टीम को लगता है कि सिर को दाएं-बाएं झटके देकर बबल्स को यह पता करने में मदद मिलती होगी कि किस ट्रेवेली ने अभी-अभी किसी शिकार को चट किया है। दूसरी ओर पीछा करने को दौरान उत्पन्न क्लिक ध्वनियां ट्रेवेली को उल्टी करने को उकसाती होंगी। वैसे शोधकर्ताओं को अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्लिक की आवाज़ें ट्रेवेली से उल्टी कैसे करवाती हैं। यह भी हो सकता है कि मछली डॉल्फिन से पीछा छुड़ाने के लिए वैसे ही उल्टी कर देती हो। बहरहाल, डॉल्फिन को तो भोजन मिल ही जाता है। (स्रोत फीचर्स)
इस वारदात के वीडियो के लिए लिंक्स
https://www.smithsonianmag.com/smart-news/meet-bubbles-a-dolphin-in-australia-that-chases-fish-until-they-barf-then-eats-their-upchucked-meals-180989547/ https://www.facebook.com/AustTraveller/videos/bubbles-has-figured-out-the-ultimate-seafood-hack-%EF%B8%8Fthis-very-cheeky-dolphin-has-/2322327231671387/
Picture credit – https://www.indiatoday.in/science/story/bottlenose-dolphin-forces-fish-to-vomit-then-eats-it-australia-study-30